Ram Madhav on India China Relations: वरिष्ठ भाजपा नेता राम माधव ने वरिष्ठ पत्रकार वसिंद्र मिश्रा के साथ बातचीत में भारत-चीन संबंधों, सीमा विवाद, व्यापार और चीन पर भारत की रणनीति को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि चीन के साथ भारत का रिश्ता केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध भी हैं। इसलिए सीमा की सुरक्षा और व्यापारिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना भारत की आवश्यकता है।
भारत-चीन व्यापार और आर्थिक संबंध
राम माधव ने कहा कि भारत-चीन के बीच करीब $150 अरब का व्यापार होता है और सेवाओं के क्षेत्र को छोड़ दें तो चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। उनके मुताबिक, सीमा पर हर इंच की रक्षा करना और आर्थिक संबंधों को संतुलित रखना दोनों समान रूप से जरूरी हैं।
2017 के बाद चीन नीति में बदलाव का दावा
उन्होंने दावा किया कि 2017 के बाद मोदी सरकार ने चीन को लेकर अपनी नीति बदली। पहले सीमा उल्लंघन पर केवल कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया जाता था, जबकि अब भारतीय सेना भी मौके पर मजबूती से खड़ी होती है। उन्होंने इसका उदाहरण डोकलाम विवाद को बताया, जहां भारत ने चीन के सड़क निर्माण का केवल विरोध ही नहीं किया बल्कि अपने भारी उपकरण भी तैनात किए। उनके अनुसार 72 दिन तक दोनों पक्ष आमने-सामने रहे और अंततः चीन को अपने उपकरण हटाने पड़े, जिसके बाद वह सड़क आज तक नहीं बन सकी।
गलवान और सीमा पर भारत का रुख
राम माधव ने गलवान का भी जिक्र करते हुए कहा कि चीन ने कई स्थानों पर घुसपैठ की कोशिश की, लेकिन भारत ने सेना, टैंक और वायुसेना की तैनाती के साथ कड़ा जवाब दिया। उनके मुताबिक, बाद में अधिकांश विवादित बिंदुओं पर समझौता हुआ और चीन पीछे हटा।
अरुणाचल-लद्दाख पर दावों को बताया गलत
अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में चीन के 60 किलोमीटर अंदर घुसने के दावों को उन्होंने गलत बताया। उनका कहना था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर फेंसिंग नहीं है और दोनों देशों की सेनाएं नियमित गश्त करती हैं, इसलिए ऐसे दावों को आक्रमण नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि आज भारत अरुणाचल और लद्दाख दोनों सीमाओं पर पूरी सतर्कता के साथ तैनात है।
चीन को भारत का स्पष्ट संदेश
भारत की चीन नीति पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए राम माधव ने कहा कि सरकार चीन के प्रति कमजोर नहीं है। उनका कहना था कि भारत ने चीन से स्पष्ट कहा है कि वह भारत की भावनाओं, संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों का सम्मान करे।
चीनी आयात और निर्भरता पर क्या बोले?
व्यापार को लेकर उन्होंने माना कि आम उपभोक्ता वस्तुओं के मामले में मोदी सरकार ने चीन से आयात पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि ईवी बैटरी, डीप-टेक और दवा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले बेस केमिकल्स जैसे क्षेत्रों में भारत अभी भी चीन पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत इन क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ाएगा, यह निर्भरता भी कम होगी। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि भारत-चीन व्यापार में अभी भी असंतुलन है क्योंकि भारत चीन से ज्यादा आयात और कम निर्यात करता है।

