Ram Mandir: 2020 में, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के कुछ महीनों बाद हुए एक निजी ऑडिट में प्रबंधन व्यवस्था को काफी अव्यवस्थित बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, दान और वित्तीय लेन-देन का ठीक से रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा था। साथ ही, कामकाज को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए जल्द से जल्द मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की आवश्यकता बताई गई थी।
SOP और जवाबदेही पर जोर
नवंबर 2020 में सौंपी गई रिपोर्ट में हर स्तर पर लेनदेन, डेटा प्रबंधन और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए SOP बनाने की सिफारिश की गई थी। ऑडिटरों ने चेतावनी दी थी कि बिना स्पष्ट प्रक्रिया के गलत रिपोर्टिंग और भ्रामक सूचनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
वित्तीय और प्रशासनिक कमजोरियां
रिपोर्ट में कहा गया कि प्रबंधन की जिम्मेदारियां स्पष्ट नहीं थीं, वित्तीय रिकॉर्ड व्यवस्थित नहीं थे और लेन-देन की जांच के लिए उचित सत्यापन व्यवस्था भी नहीं थी। इसलिए, जवाबदेही तय करने और कामकाज में बेहतर समन्वय लाने की सलाह दी गई थी।
दान और आभूषण प्रबंधन पर चिंता
ऑडिट में नकद और आभूषण जैसे दान की निगरानी को लेकर भी चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में इन-काइंड दान के लिए उचित स्टॉक रजिस्टर बनाए रखने की सिफारिश की गई थी। ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार यदि इन सुझावों को लागू किया जाता तो वर्तमान विवाद से बचा जा सकता था।
वर्तमान विवाद और आईटी संबंधी जोखिम
हाल में नकदी और आभूषणों के कथित हिसाब-किताब में गड़बड़ी के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी गई है। रिपोर्ट में मानव संसाधन विभाग की कमी, बैंक मिलान और लेखांकन के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता भी बताई गई थी। डेटा सुरक्षा को लेकर ऑडिट ने चिंता जताई थी। आईटी सेवा प्रदाता की सुरक्षा व्यवस्था, डेटा संरक्षण और आंतरिक नियंत्रण के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। रिपोर्ट में एक योग्य समन्वयक नियुक्त करने और मजबूत आईटी नियंत्रण प्रणाली विकसित करने की सिफारिश की गई थी।
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