अध्यात्म

Ninth Day of Chaitra Navratri: राम नवमी पर मिलेगा सिद्धियों का वरदान, जानिए मां सिद्धिदात्री पूजा का सही मुहूर्त और विधि

Ninth Day of Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन विशेष महत्व रखता है। यह दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है, जिन्हें सभी सिद्धियों और पूर्णता की देवी माना जाता है। इस वर्ष 27 मार्च 2026 को राम नवमी और मां सिद्धिदात्री की पूजा एक साथ मनाई जाएगी, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।

क्यों खास है मां सिद्धिदात्री का दिन?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को अष्ट सिद्धियों का आशीर्वाद देती हैं। माना जाता है कि भगवान शिव ने भी इन्हीं की कृपा से ये शक्तियां प्राप्त कीं और अर्धनारीश्वर रूप धारण किया। नवरात्रि के अंतिम दिन इनकी पूजा करने से पूरे नौ दिनों की साधना का पूर्ण फल मिलता है।

पूजा के शुभ मुहूर्त (27 मार्च 2026)

• सुबह का शुभ समय: 06:18 बजे से 10:15 बजे तक
• राम जन्मोत्सव मुहूर्त: 11:13 बजे से 01:41 बजे तक
• अभिजीत मुहूर्त: 12:02 बजे से 12:51 बजे तक

इन समयों में पूजा, हवन और कन्या पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

कैसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा?

पूजा के दिन स्वच्छ होकर बैंगनी या लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। मां सिद्धिदात्री को कमल का फूल अर्पित करें और धूप-दीप से पूजा करें। भोग में हलवा, पूरी और काले चने अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है। इसके बाद हवन करना जरूरी होता है, जिसमें “ॐ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नमः” मंत्र का जाप करते हुए आहुति दी जाती है।

कन्या पूजन का विशेष महत्व

नवमी के दिन नौ कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराना और भेंट देना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पूजा मां दुर्गा के नौ रूपों का आशीर्वाद पाने का माध्यम मानी जाती है।

अष्ट सिद्धियों का रहस्य

मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को आठ प्रकार की दिव्य शक्तियां प्रदान करती हैं।

• अणिमा: सूक्ष्म बनने की शक्ति
• महिमा: विशाल रूप धारण करने की शक्ति
• गरिमा: अत्यंत भारी बनने की क्षमता
• लघिमा: हल्का होकर गति करने की शक्ति
• प्राप्ति: इच्छित वस्तु प्राप्त करने की शक्ति
• प्राकाम्य: इच्छाओं को पूर्ण करने की शक्ति
• ईशित्व: नियंत्रण और अधिकार की शक्ति
• वशित्व: दूसरों को प्रभावित करने की शक्ति

नवरात्रि का समापन

मां सिद्धिदात्री की पूजा न सिर्फ आध्यात्मिक उन्नति देती है, बल्कि जीवन में सफलता, शांति और समृद्धि का मार्ग भी खोलती है। राम नवमी के इस पावन दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को विशेष फल प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

ये भी पढ़ें: Chaitra Navratri 2026: अष्टमी पर कब करें कन्या पूजन? चूक गए सही समय तो अधूरा रह जाएगा फल, जानें परफेक्ट मुहूर्त और नियम

Shagun Chaurasia

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