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भारत में जल्द आ सकते हैं प्लास्टिक के ₹10 और ₹20 के नोट, RBI करेगा पायलट प्रोजेक्ट

RBI Polymer Currency Notes: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगले साल ₹10 और ₹20 के पॉलिमर (प्लास्टिक) नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार शुरुआती परीक्षण इन्हीं दो मूल्यवर्गों में होगा। फील्ड ट्रायल सफल रहने पर 2027 से बड़े पैमाने पर इन नोटों को जारी किया जा सकता है।

वैश्विक टेंडर जारी

RBI की करेंसी प्रिंटिंग इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने वैश्विक कंपनियों से BOPP (Biaxially Oriented Polypropylene) आधारित पॉलिमर शीट की आपूर्ति के लिए Expression of Interest (EOI) जारी किया है। कुल 68,000 रीम (500 शीट प्रति रीम) मंगाई जाएंगी, जिनमें 34,000-34,000 रीम दो मूल्यवर्गों के लिए होंगी। इन शीटों में क्लियर विंडो विद पोर्ट्रेट, मेटैलिक न्यूमेरल, मैग्नेटिक स्यूडो थ्रेड, शैडो इमेज और इरिडेसेंट पैटर्न जैसे सुरक्षा फीचर होंगे। इनकी छपाई BRBNMPL और SPMCIL के प्रेस में होगी। टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त है।

सुरक्षा और पात्रता की शर्तें

टेंडर के अनुसार यह खरीद तत्काल आवश्यकता के लिए है, जबकि सफल परीक्षण के बाद अधिक मूल्यवर्गों के लिए बड़े ऑर्डर दिए जा सकते हैं। कंपनियों को भारत से जुड़े कार्य चीन और पाकिस्तान से पूरी तरह अलग रखने होंगे, वहां से कच्चा माल या पूर्व में वहां कार्य कर चुके कर्मियों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों के लिए DPIIT पंजीकरण अनिवार्य है। पात्र कंपनियों के पास केंद्रीय बैंक या बैंकनोट प्रिंटिंग संस्था को कम से कम 3 वर्ष तक पॉलिमर सब्सट्रेट आपूर्ति का अनुभव होना चाहिए और वे कम से कम 20,400 रीम (कुल आवश्यकता का 30%) उपलब्ध कराने में सक्षम हों। साथ ही प्रयोगशाला परीक्षण के लिए नमूने तथा सामग्री में एनिमल टैलो और DNA न होने का प्रमाण भी देना होगा।

RBI ने अभी पायलट के मूल्यवर्ग की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि जून की मौद्रिक नीति के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि पॉलिमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है और इसकी व्यवहार्यता व लाभों का आकलन किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में पहली बार पॉलिमर नोट शुरू किए थे और अब 50 से अधिक देश इनका उपयोग करते हैं। ये नोट कागजी मुद्रा की तुलना में अधिक टिकाऊ, नकली बनाना कठिन, लंबी उम्र वाले तथा लंबे समय में लागत और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने वाले माने जाते हैं।

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Tanisha Verma

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