Bihar political news: बिहार की राजनीति में उस समय बड़ा मोड़ आ गया जब जेडीयू प्रमुख और लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई। इस घोषणा के साथ ही उनके मुख्यमंत्री पद से हटने की चर्चा तेज हो गई। लगभग दो दशकों तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के इस फैसले ने विपक्षी दलों, खासकर आरजेडी को बीजेपी और जेडीयू पर निशाना साधने का मौका दे दिया है।
आरजेडी नेताओं ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह सब पहले से तय राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि बिहार की राजनीति में अचानक आए इस बदलाव की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उनके मुताबिक, विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद बीजेपी द्वारा इतनी जल्दी मुख्यमंत्री को बदलने का कदम अप्रत्याशित है।
मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उनके नेता तेजस्वी यादव पहले से ही चेतावनी देते आ रहे थे कि भाजपा धीरे-धीरे जेडीयू को कमजोर कर देगी और अंततः नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान घटनाक्रम उसी दिशा में उठाया गया कदम प्रतीत होता है।
आरजेडी ने बीजेपी पर महाराष्ट्र की तर्ज पर बिहार में भी ‘शिंदे मॉडल’ अपनाने का आरोप लगाया है। आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि नीतीश कुमार द्वारा किया गया ट्वीट कई सवाल खड़े करता है। उनके अनुसार, ट्वीट की भाषा और शैली से ऐसा नहीं लगता कि इसे स्वयं नीतीश कुमार ने लिखा या उनके निर्देश पर लिखा गया हो।
मनोज झा ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह संदेश दिल्ली से तैयार होकर आया है। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम से जेडीयू के मूल विचार और संगठनात्मक आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह खबर सही साबित होती है, तो इसे बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के समापन के रूप में देखा जाएगा।
दूसरी ओर, नीतीश कुमार ने अपने बयान में बिहार की जनता के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय तक लोगों ने उन पर भरोसा जताया और इसी विश्वास के कारण उन्हें राज्य की सेवा करने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि जनता के समर्थन से बिहार ने विकास और सम्मान के नए आयाम हासिल किए हैं। अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने राजनीतिक जीवन में बिहार विधानसभा के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों का सदस्य बनने की इच्छा रखते थे।
नीतीश कुमार ने कहा कि इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इस बार राज्यसभा सदस्य बनने का फैसला किया है। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि भले ही उनकी भूमिका बदले, लेकिन बिहार के विकास के लिए उनका संकल्प और जुड़ाव पहले की तरह बना रहेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि वे विकसित बिहार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भविष्य में भी जनता के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।
विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए को मिली बड़ी जीत के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि बिहार में बीजेपी का कोई नेता मुख्यमंत्री पद संभाल सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय होगा। तब बिहार पहला ऐसा हिंदी भाषी राज्य नहीं रहेगा जहां बीजेपी ने अब तक मुख्यमंत्री पद नहीं संभाला था। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने फिलहाल बिहार की राजनीति में नई बहस और अटकलों को जन्म दे दिया है, और आने वाले दिनों में इसका असर राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।
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