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विजयादशमी पर मोहन भागवत बोले -‘पहलगाम ने सिखाया, देश की सुरक्षा में सतर्क और समर्थ रहना जरूरी’

Dussehra 2025 : पूरे देशभर में आज विजयादशमी उत्सव मनाया जा रहा है । इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का शताब्दी समारोह भी नागपुर में मनाया जा रहा है। समारोह में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी शामिल हैं।

इस अवसर पर दलाई लामा का भेजा गया संदेश भी पढ़ा गया, जिसमें उन्होंने संघ को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने विचार साझा किए और देश के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी तथा सेवा भाव पर विशेष जोर दिया। आरएसएस का यह शताब्दी समारोह और विजयादशमी उत्सव संघ की सेवा, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक योगदान को समर्पित रहा।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बोले-

इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, “आज का विजयादशमी उत्सव आरएसएस की शताब्दी का प्रतीक है। नागपुर की यह पावन भूमि आधुनिक भारत की महान विभूतियों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर से जुड़ी है।” उन्होंने आरएसएस को एक “पवित्र और विशाल वटवृक्ष” की संज्ञा देते हुए कहा कि यह संगठन भारतवासियों को एकजुट करता है और उन्हें गौरव तथा प्रगति का बोध कराता है।

मोहन भागवत ने आतंकवादियों का किया जिक्र

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में पूरे भारत में श्रद्धा और एकाग्रता की लहर फैली, जबकि पहलगाम में आतंकवादियों ने धर्म पूछकर निर्दोष नागरिकों की हत्या की। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना का योगदान वैश्विक स्तर पर सराहा गया है और देश के भीतर संवैधानिक उग्रवादी तत्वों का सामना करना भी आवश्यक है।

भागवत ने आगे कहा, “यह वर्ष श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान का साढ़े तीन सौवां वर्ष है। उन्होंने अत्याचार, अन्याय और सांप्रदायिक भेदभाव से समाज की मुक्ति के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और समाज की रक्षा की। उनकी यह विभूति इस वर्ष विशेष रूप से स्मरण की जाएगी।"

उन्होंने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को भी याद करते हुए कहा, “आज 2 अक्टूबर है, स्वर्गीय महात्मा गांधी की जयंती है। स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान अविस्मरणीय है। स्वतंत्रता के बाद भारत के भविष्य पर विचार देने वाले दार्शनिक नेताओं में उनका स्थान अग्रणी है। इसके साथ ही स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण अर्पित किए। भक्ति और देश सेवा के ये उत्तम उदाहरण हम सभी के लिए प्रेरणादायक हैं।”

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Kajal Sharma

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