अध्यात्म

Shardiya Navratri 2025 : कैसे करें कलश स्थापना, जानें सही विधि और शुभ समय

Shardiya Navratri 2025 : आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। प्रतिपदा तिथि पर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाले इस महाव्रत की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत का पालन करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति और शुभता आती है।

पूजा विधि

  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर देवी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं।
  • कलश में गंगाजल भरें और उसमें सुपारी, दूर्वा घास, अक्षत और सिक्के डालें।
  • कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर नारियल स्थापित करें।
  • यह कलश जौ वाले बर्तन के ऊपर रखा जाता है।
  • कलश स्थापना के बाद देवी दुर्गा का आह्वान करें और नौ दिनों तक विधिवत पूजा-अर्चना करें।
  • साधक इस दौरान उपवास रखते हैं और प्रतिदिन प्रातः व संध्या देवी की आरती करते हैं।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, कलश स्थापना का शुभ समय प्रातः 06:09 बजे से 08:06 बजे तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त 11:49 बजे से 12:38 बजे तक है। इन समयों में कलश स्थापना करना विशेष फलदायी माना गया है।

मां शैलपुत्री को क्या अर्पित करें?

  • मां शैलपुत्री को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है। अतः भक्त इस दिन सफेद वस्त्र पहनते हैं।
  • देवी को रोली, अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें।
  • फूलों में लाल गुड़हल और सफेद पुष्प विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं।

प्रिय भोग

  • मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • घी से बनी मिठाई, हलवा, सफेद पेड़े या सफेद बर्फी का भोग लगाएं।
  • यह भोग श्रद्धा और सात्विकता के साथ ही तैयार होना चाहिए।

पूजा का महत्व

मां शैलपुत्री की उपासना से भक्तों को स्थिरता, शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। नवरात्र के नौ दिन आत्म-शुद्धि, चिंतन और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। इस दौरान भक्त देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा कर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं।

पूजा मंत्र

  • सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
    शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते।।
  • देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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नवरात्रि (Shardiya Navratri 2025) का यह पावन पर्व साधना, संयम और आत्मचिंतन का अवसर है। भक्त इस दौरान यथासंभव मां की आराधना, दान और सात्विक आचरण का पालन करें।

Shweta Gupta

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