Sher Shah Suri Tomb: बिहार के सासाराम में 1545 से खड़ा शेरशाह सूरी का मकबरा संरक्षण को लेकर सवालों के घेरे में है। 22 एकड़ की कृत्रिम झील के बीच बने 122 फीट ऊंचे लाल बलुआ पत्थर के इस मकबरे को लेकर ASI की RTI जानकारी में कई अहम बातें सामने आई हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, 9 अगस्त 2026 को मकबरे के मुख्य गुंबद के ऊपरी हिस्से से एक पत्थर टूटकर गिर गया था। वहीं, मकबरे की झील को पानी देने और बाहर निकालने वाली नहरें ASI के अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं।
ASI के सासाराम सब-सर्किल की रिपोर्ट के अनुसार, 9 अगस्त को शाम करीब 6 बजे मकबरे के मुख्य गुंबद के ऊपरी हिस्से से पत्थर टूटकर गिरा। इससे उस हिस्से को नुकसान पहुंचा। घटना की तस्वीरों में मकबरे के आधार के पास टूटे हुए पत्थरों के टुकड़े दिखाई दिए। ASI के मुताबिक, इस घटना में कोई पर्यटक घायल नहीं हुआ।
ASI के अनुसार, मकबरे की मूल योजना के तहत करीब 1.8 किलोमीटर लंबी इनलेट नहर सोन नदी की हाई लेवल नहर से कृत्रिम झील तक पानी पहुंचाती है। वहीं, करीब 2.1 किलोमीटर लंबी आउटलेट नहर झील का पानी बाहर निकालती है। समय के साथ दोनों नहरें जर्जर होने के साथ अतिक्रमण का शिकार हो गईं। स्थानीय लोगों ने इन नहरों में अपने घरों की ड्रेनेज जोड़ दी, जिससे सीवरेज का पानी झील में पहुंचने लगा। इसके अलावा ठोस और तरल कचरे के कारण पानी के प्रदूषित होने की स्थिति सामने आई है।
RTI में नहरों की सफाई, मरम्मत और गाद हटाने से जुड़े सवालों पर ASI ने कहा कि ये नहरें उसके संरक्षण या अधिग्रहण में नहीं हैं। इसलिए विभाग इनकी मरम्मत, सफाई या डी-सिल्टिंग नहीं कर सकता। वहीं, 2018 के बाद से झील के पानी की गुणवत्ता की जांच हुई या नहीं, इस सवाल के जवाब में ASI ने ‘जानकारी उपलब्ध नहीं’ बताया।
ASI ने 14 सितंबर 2026 को रोहतास के जिलाधिकारी को भेजे पत्र में प्रभाकर मोड़ के पास इनलेट नहर में स्थानीय दुकानदारों, नारियल विक्रेताओं और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से निकलने वाले कचरे का जिक्र किया। पत्र में आसपास के अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का भी उल्लेख किया गया। ASI ने कहा कि बारिश के पानी के साथ यह कचरा नहर और टैंक में पहुंच सकता है, जिससे पानी की गुणवत्ता और मछलियों पर असर पड़ सकता है।
रोहतास के जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने कहा कि सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शेरशाह के तालाब में साफ पानी लाने के लिए जल संसाधन विभाग बेदा नहर से पानी पहुंचाने की नई परियोजना तैयार करेगा। जिलाधिकारी के मुताबिक, मकबरे और इनलेट नहर के आसपास डाले जा रहे मेडिकल वेस्ट और कचरे की जांच की जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि तालाब का पानी फिलहाल स्थिर है और ठीक से शुद्ध या सर्कुलेट नहीं हो रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग ने परियोजना तैयार की है, जिसका कार्यान्वयन चल रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद तालाब का पानी नियमित रूप से बदला जाएगा। जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि मकबरे की सीमा और अंदर के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं और कुछ पत्थर टूट रहे हैं।
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