होर्मुज से सुरक्षित निकला ‘शिवालिक
Kutch Shivalik LPG Mundra Port: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर शिवालिक युद्ध प्रभावित समुद्री क्षेत्र से सुरक्षित निकलकर अब भारत पहुंचने वाला है। यह जहाज करीब 45 हजार मीट्रिक टन रसोई गैस (एलपीजी) लेकर गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस खेप के आने से देश में चल रही गैस की कमी को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
दरअसल पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हो गई थीं। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में कई जहाज फंस गए थे। इसी संवेदनशील समुद्री रास्ते से गुजरते हुए शिवालिक जहाज भारत की ओर रवाना हुआ था।भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों के बाद दो भारतीय रसोई गैस जहाजों को वहां से निकलने की अनुमति मिली। इनमें से पहला जहाज शिवालिक अब मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने वाला है, जबकि दूसरा जहाज नंदा देवी 17 मार्च को गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है।
इसी दौरान एक अन्य भारतीय तेल टैंकर जग लाडकी भी संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह से लगभग 80,800 टन कच्चा तेल लेकर सुरक्षित भारत की ओर रवाना हो चुका है। इसके अलावा एक और भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर जग प्रकाश भी हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। यह जहाज ओमान के सोहर बंदरगाह से पेट्रोल लेकर अफ्रीकी देश तंजानिया के टांगा बंदरगाह की ओर जा रहा है और 21 मार्च तक वहां पहुंचने की उम्मीद है।
सरकारी जानकारी के अनुसार फिलहाल फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं, जिन पर 611 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। सरकार ने कहा है कि क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है और समुद्री गतिविधियों की निगरानी जारी है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। देश लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और करीब 60 प्रतिशत रसोई गैस बाहर से मंगाता है। पश्चिम एशिया के देश, खासकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता रहे हैं। लेकिन हालिया संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है।
इसके चलते औद्योगिक उपभोक्ताओं को मिलने वाली गैस सीमित कर दी गई है और होटल-रेस्तरां जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलने वाली रसोई गैस में भी कटौती की गई है। हालांकि भारत ने कुछ हद तक रूस सहित अन्य देशों से तेल खरीदकर आपूर्ति की कमी को संतुलित करने की कोशिश की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिवालिक जहाज से आने वाली यह बड़ी रसोई गैस की खेप फिलहाल देश में चल रही गैस की कमी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही यह भी संकेत है कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए लगातार रणनीतिक और कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।
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