अध्यात्म

Shubh Muhurat : शुभ मुहूर्त, तिथि और पूजा की संपूर्ण जानकारी

Shubh Muhurat : हिंदू पंचांग अनुसार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस वर्ष 16 अगस्त को मनाई जा रही है। हालांकि इसमें कुछ ज्योतिषीय पेच हैं जैसे कि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का मेल मध्यरात्रि में नहीं बन रहा, फिर भी पारंपरिक हिंदू नियमों के अनुसार उदय (सूर्योदय की तिथि) को महत्व दिए जाते हुए इस दिन ही व्रत और पूजा संपन्न की जाएगी ।

क्या है जन्माष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त

इस बार जन्माष्टमी की पूजन का सबसे शुभ समय आज 16 अगस्त की मध्यरात्रि 12:01 से 12:45 बजे तक माना गया है । दैनिक पंचांग और कई स्रोतों अनुसार पूजा का यह समय लगभग 43 मिनट का है। अन्य रिपोर्ट्स में यह 12:04 से 12:47 बजे बताया गया है, जो लगभग मेल खाता है ।

कैसे चुनें श्री कृष्ण की मूर्ति?

जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण की मूर्ति स्थापित की जाती है। लेकिन आप अपनी मनोकामना के हिसाब से भी कृष्ण की मूर्ति को चुन सकते हैं। यदि प्रेम और दांपत्य
सुख की कामना हो तो राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। संतान प्राप्ति के लिए बाल कृष्ण का स्वरूप चुनें। और समग्र मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बंसीधारी कृष्ण को घर में विराजमान करें।

तिथि और ज्योतिषीय विवरण

अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 11:49 बजे से शुरू होकर 16 अगस्त की रात 9:34 बजे तक रहेगी। पारंपरिक मान्यता के अनुसार जन्म रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि दोनों के संयोग से हुआ था, लेकिन इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त की सुबह 4:38 बजे से शुरू होकर 18 अगस्त की सुबह 3:17 बजे तक रहेगा। इस कारण “उदय तिथि” का आधार लेकर, जन्माष्टमी का उत्सव 16 अगस्त को ही मनाया जा रहा है।

मंत्रों से भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें

भगवान कृष्ण का नाम ही एक महामंत्र है। इसका भी जप किया जा सकता है। इसके अलावा आप “हरे कृष्ण” का भी जप कर सकते हैं । जीवन में प्रेम और आनंद के लिए “मधुराष्टक” का पाठ करें।

श्री कृष्ण का श्रृंगार कैसे करें?

श्री कृष्ण के श्रृंगार में फूलों का बहुत महत्व होता है। इस दिन पूजा के लिए ताजे और सुगंधित फूलों का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें। लड्डू गोपाल को पीले रंग के वस्त्र पहनाएं। माथे और शरीर पर चंदन लगाएं। कृष्ण पर वैजयंती के फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है। श्रृंगार पूरा होने के बाद कान्हा को आईना दिखाकर उनकी सुंदरता का दर्शन कराएं।

ये भी पढ़े : Janmashtami 2025: बिना पंचामृत के अधूरी है जन्माष्टमी की पूजा, जानें सही विधि और महत्व

पूजन विधि क्या है?

  • भक्त सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं एवं दिनभर केवल फलाहार या निर्जल उपवास रखते हैं।
  • रात्रि में कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। उन्हें झूला झुलाया जाता है, लड्डू गोपाल का श्रृंगार करते हैं, माखन का भोग लगाते हैं और आरती उतारते है।
  • व्रत का पारण (व्रत खोलना) निशिता पूजन के बाद ही होता है, आमतौर पर 17 अगस्त की सुबह या Ashtami तिथि समाप्ति के बाद किया जाता है ।
Shweta Gupta

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