होम = Others = बेटियों को पढ़ाया-लिखाया, आखिर में वृद्धाश्रम में टूटी सांसें…वीडियो कॉल पर हुई पिता की अंतिम विदाई, बेटी ने भेजे 5,000 रूपए

बेटियों को पढ़ाया-लिखाया, आखिर में वृद्धाश्रम में टूटी सांसें…वीडियो कॉल पर हुई पिता की अंतिम विदाई, बेटी ने भेजे 5,000 रूपए

Sonipat old age home: हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में रह रहे शिवचरण राम रतन गुप्ता का मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। मूल रूप से मुंबई के रहने वाले और पूर्व कपड़ा व्यापारी गुप्ता पिछले करीब दो वर्षों से अपनी पत्नी मीना के साथ वृद्धाश्रम में रह रहे थे। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था।

वीडियो कॉल पर बेटियों ने देखे अंतिम संस्कार के दृश्य

गुप्ता के निधन के बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने उनकी तीनों बेटियों को सूचना दी, लेकिन कोई भी अंतिम संस्कार में सोनीपत नहीं पहुंच सकी। इसके बाद अंतिम संस्कार वृद्धाश्रम प्रबंधन और स्थानीय लोगों की मदद से कराया गया, जबकि बेटियां नेपाल, उत्तर प्रदेश और मुंबई से वीडियो कॉल के जरिए जुड़ी रहीं।

वृद्धाश्रम के प्रशासक आनंद कुमार ने बताया कि गुप्ता अपनी बेटियों से फोन पर बात करते थे, लेकिन बीमार होने के बाद बातचीत कम हो गई थी। करीब 20 दिन पहले बेटियों को उनकी गंभीर हालत की जानकारी भी दी गई थी, फिर भी वे मिलने नहीं आईं। निधन के बाद भी प्रबंधन ने आने का आग्रह किया, लेकिन बेटियों ने समय न होने की बात कही।

नेपाल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत बेटी अनीता ने अंतिम संस्कार के लिए 5,100 रुपये ऑनलाइन भेजे और पिता का अंतिम संस्कार विधिवत कराने का अनुरोध किया। अंतिम संस्कार के बाद बेटियों ने उसका वीडियो भी मंगवाया। वीडियो कॉल के दौरान एक बेटी ने कहा, "और कितना समय लगेगा? हमें खाना खाना है और नहाना भी है।"

बेटियों की शिक्षा पर था गर्व, आंखें भी हुईं दान

वृद्धाश्रम प्रबंधन के अनुसार, गुप्ता ने अपनी तीनों बेटियों की अच्छी शिक्षा सुनिश्चित की थी और उनकी उपलब्धियों पर गर्व करते थे। उनकी दो बेटियां शिक्षिका हैं। निशा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती हैं, जबकि सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में रहती हैं। तीनों विवाहित हैं।

परिवार ने पहले उनकी अस्थियां सुरक्षित रखने को कहा, लेकिन बाद में समय न होने की बात कहते हुए वृद्धाश्रम से ही गंगा में विसर्जन कराने का अनुरोध किया। वहीं, परिवार की इच्छा के अनुसार गुप्ता की आंखें भी दान की गईं, जिससे जरूरतमंद लोगों को दृष्टि मिल सके।

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