Strait of Hormuz Tanker Attacks: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। होरमुज जलडमरूमध्य में 24 घंटे के भीतर कतर के एलएनजी (LNG) पोत समेत तीन तेल टैंकरों पर हमले हुए। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान ने इन हमलों को लेकर अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया और कड़े जवाब की चेतावनी दी। वहीं, इसी बीच इजरायल और लेबनान के बीच अगले दौर की वार्ता की भी घोषणा हुई।
तीन टैंकरों पर लगातार हमले
ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ (UKMTO) और कतर के अनुसार, 24 घंटे के भीतर तीन टैंकरों को निशाना बनाया गया। पहला हमला रात में ओमान के लिमाह तट के पास हुआ, जहां एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल टैंकर से टकराया, जिससे जहाज में आग लग गई। इसके बाद दो अन्य टैंकर भी हमलों का शिकार हुए, जिनमें कम से कम एक पर ड्रोन (Uncrewed Aerial Vehicle-UAV) से हमला किया गया। तीनों जहाज ओमान के तट के पास होरमुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे।
यह घटना उस समय हुई जब ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के शोक समारोह चल रहे थे। यह उनके अंतिम संस्कार के बाद होरमुज में दर्ज पहली बड़ी सुरक्षा घटना मानी जा रही है।
ईरान की शर्त और अंतिम संस्कार में बदले की मांग
हमलों से पहले ईरान ने कहा था कि जब तक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध दोबारा शुरू करने की अपनी धमकियां बंद नहीं करते, तब तक शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी। दूसरी ओर, खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल लाखों लोगों ने उनके निधन का बदला लेने की शपथ ली।
इजरायल-लेबनान वार्ता 15-16 जुलाई को
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने पुष्टि की कि लेबनान के साथ अगले दौर की वार्ता 15 और 16 जुलाई को इटली की राजधानी रोम में होगी। यह बैठक अमेरिकी समर्थन से पिछले महीने हुए रूपरेखा समझौते को आगे बढ़ाने के लिए आयोजित की जा रही है। सार ने कहा कि "लेबनान में इजरायल की कोई क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा नहीं है।" विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, वार्ता राजदूत स्तर पर होगी।
यूकेएमटीओ की लगातार चेतावनियां
तीसरा हमला (7 जुलाई)
यूकेएमटीओ ने बताया कि तीसरे टैंकर को भी एक अज्ञात मानवरहित ड्रोन (UAV) ने निशाना बनाया। जहाज को मामूली संरचनात्मक क्षति पहुंची, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ और न ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचा।
तीन हमलों की पुष्टि (7 जुलाई)
ब्रिटिश सेना ने पुष्टि की कि मंगलवार को तीनों टैंकरों पर प्रोजेक्टाइल से हमले किए गए। इन घटनाओं से फारस की खाड़ी और वैश्विक समुद्री व्यापार पर नया संकट पैदा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
अमेरिका का जवाबी हमला (8 जुलाई)
तीन व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर जवाबी हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि यह कार्रवाई होरमुज से गुजर रहे व्यावसायिक जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में की गई है और इसका उद्देश्य ऐसे हमलों की "भारी कीमत" चुकवाना है।
अमेरिका ने यह कार्रवाई ऐसे समय की, जब उसने ईरानी तेल पर दी गई अस्थायी प्रतिबंध छूट (Sanctions Waiver) भी वापस ले ली थी, जिससे तेहरान पर दबाव और बढ़ गया।
ईरान में धमाकों की खबर
अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने होरमुज क्षेत्र में कई विस्फोटों की सूचना दी। आईआरआईबी (IRIB) के मुताबिक, क़ेश्म द्वीप पर छह, सीरिक शहर में सात और बंदर अब्बास बंदरगाह क्षेत्र में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
ईरान की चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) का बार-बार उल्लंघन करने का आरोप लगाया। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई और लेबनान सहित क्षेत्र में जारी आक्रामक गतिविधियां समझौते के खिलाफ हैं। ईरान ने चेतावनी दी कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए "निर्णायक कदम" उठाएगा।
किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ताजा हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणालियां, तटीय निगरानी प्रणाली, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइलें और ड्रोन लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया गया। हालांकि सेंट्रल कमांड ने आधिकारिक तौर पर लक्ष्यों का विस्तृत विवरण जारी नहीं किया।
अमेरिकी रक्षा मंत्री इजरायल जाएंगे
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ बुधवार को इजरायल का दौरा करने की योजना बना रहे हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा में क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान के खिलाफ आगे की रणनीति और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा होगी।
इन घटनाओं ने एक बार फिर होरमुज जलडमरूमध्य को वैश्विक तनाव का केंद्र बना दिया है। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम इस समुद्री मार्ग पर बढ़ती अस्थिरता से न केवल पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर भी गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
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