sugar free gut health: आजकल फिटनेस और हेल्थ के नाम पर चीनी पूरी तरह छोड़ने का चलन बढ़ रहा है। कई लोग चाय-कॉफी में चीनी की जगह शुगर-फ्री या आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करने लगे हैं। ज्यादा चीनी का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है, लेकिन क्या इसे डाइट से पूरी तरह हटाना भी सही है? एक नई रिसर्च ने इस सवाल को लेकर ध्यान खींचा है।
रिसर्च में डाइट से चीनी पूरी तरह हटाने के संभावित प्रभावों को गट माइक्रोबायोम और मेटाबॉलिक हेल्थ के संदर्भ में देखा गया। गट माइक्रोबायोम में आंतों में रहने वाले अलग-अलग प्रकार के सूक्ष्मजीव शामिल होते हैं, जो पाचन और शरीर की कई प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं। चूहों पर की गई एक स्टडी में 16 सप्ताह तक अलग-अलग डाइट के प्रभावों का अध्ययन किया गया। इसमें ग्लूकोज नियंत्रण, इंसुलिन संवेदनशीलता, मेटाबॉलिक हार्मोन, गट माइक्रोबायोम और सूजन जैसे पहलुओं की जांच की गई।
शोधकर्ताओं ने पाया कि बिना चीनी वाली डाइट लेने वाले चूहों में ग्लूकोज नियंत्रण प्रभावित हुआ और इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़े बदलाव दिखाई दिए। साथ ही गट माइक्रोबायोम के संतुलन में बदलाव, आंतों में सूजन और फैटी लिवर जैसे प्रभाव भी देखे गए। वहीं, चीनी वाली डाइट लेने वाले चूहों के वजन में कोई खास अंतर नहीं पाया गया और उनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्या भी नहीं दिखी। हालांकि, यह जानकारी पशुओं पर हुई रिसर्च से जुड़ी है और इसके आधार पर इंसानों के लिए सीधे निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्यादा मीठा खाना कम करना जरूरी है, लेकिन बिना विशेषज्ञ की सलाह के चीनी को पूरी तरह हटाना या अचानक आर्टिफिशियल स्वीटनर शुरू करना सही तरीका नहीं है। संतुलित आहार लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है। खासकर डायबिटीज, मोटापा या हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को अपनी डाइट में बड़े बदलाव डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह से ही करने चाहिए।
चीनी को लेकर सबसे जरूरी बात संतुलन है। रोजाना जरूरत से ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ लेने से बचना चाहिए। वहीं, सोशल मीडिया पर मिलने वाली सलाह के आधार पर किसी खास डाइट या Sugar-Free प्रोडक्ट को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले उसके प्रभाव को समझना जरूरी है।
चीनी का अधिक सेवन निश्चित रूप से कम किया जाना चाहिए, लेकिन इसे पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए जरूरी या सही हो, ऐसा निष्कर्ष इस रिसर्च से नहीं निकाला जा सकता। संतुलित खान-पान और व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार डाइट तय करना बेहतर विकल्प है।
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