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‘पंजाब में नशे से नाराज था…’, सुखबीर बादल पर कृपाण चलाने वाले आरोपी ने बताई वजह, पुणे तक पहुंची जांच

by | Aug 14, 2026 | News Featured, देश

Sukhbir Singh Badal Attack: शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ के गुरुद्वारा माता साहिब देवन जी मुकट में कृपाण से हमले के मामले में आरोपी की पहचान जसपाल सिंह के तौर पर हुई है। पुलिस के मुताबिक, वह करीब 60-62 साल का है और पिछले लगभग दो वर्षों से गुरुद्वारे में सेवादार था। मूल रूप से पुणे में परिवार के साथ रहने वाला जसपाल नांदेड़ में अकेला रहता था। हमले के बाद उसने कथित तौर पर दो बार कहा, “मैं सरेंडर करता हूं।” पुलिस ने बताया कि वह निहंग संप्रदाय से जुड़ा है।

नांदेड़ के एसपी नीलाभ रोहन के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में जसपाल ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर नाराजगी जताई, लेकिन हमले की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस उसके बैकग्राउंड की जांच कर रही है। फिलहाल किसी गिरोह से संबंध या आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। महाराष्ट्र ATS भी जांच में शामिल है और पुणे स्थित उसके घर पर टीम पहुंची। आरोपी की पत्नी और एक विवाहित बेटी है।

सुखबीर बादल के हाथ में लगे 2-3 टांके

गुरुवार दोपहर करीब 1:45 बजे नांदेड़ से 15 किमी दूर हुए हमले में बादल के दाहिने हाथ में चोट लगी और 2-3 टांके लगाए गए। उनकी हालत स्थिर बताई गई है। प्रत्यक्षदर्शी रविंदर सिंह बुंगई के मुताबिक, सीढ़ियों से उतरने के बाद पैर धोने वाली जगह पर पहुंचते ही उन पर हमला हुआ। आरोपी ने इसके बाद सरेंडर की बात कही। यह बादल पर दूसरा बड़ा हमला है। दिसंबर 2024 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भी उन पर गोली चलाई गई थी।

पुराने विवाद फिर चर्चा में

हमले के बाद बहिबल कलां, बरगाड़ी बेअदबी और 2015 की पुलिस फायरिंग जैसे पुराने मामलों की चर्चा फिर शुरू हुई है। कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर सिख समुदाय में नाराजगी हो सकती है, लेकिन असहमति हिंसा को सही नहीं ठहराती।

सुखबीर बादल का गुरमीत राम रहीम को 2015 में मिली माफी से जुड़ा विवाद भी पुराना है। 2007 में राम रहीम की वेशभूषा को लेकर विवाद हुआ था। 2015 में अकाल तख्त से मिली माफी और बाद में उसकी वापसी ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचाई थी। SGPC द्वारा माफी के समर्थन में विज्ञापन पर करीब 90 लाख रुपये खर्च करने का मुद्दा भी उठा था। 30 अगस्त 2024 को अकाल तख्त ने सुखबीर बादल को धार्मिक कदाचार के मामले में तनखैया घोषित किया था। दिसंबर में उन्हें विभिन्न गुरुद्वारों में सेवादारी, बर्तन साफ करने और पहरेदारी की धार्मिक सजा दी गई। हालांकि, इन पुराने विवादों और नांदेड़ हमले के बीच सीधा संबंध होने का कोई पुष्ट प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है।

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