Swine flu cases in India: देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लूएंजा ए के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में मरीज पहुंच रहे हैं और कुछ को भर्ती भी करना पड़ रहा है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही से बचना जरूरी है। कुछ मरीजों में संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर निमोनिया जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
वायरस में होते हैं लगातार बदलाव
गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. सतीश कौल के मुताबिक इन्फ्लूएंजा वायरस समय के साथ बदलता रहता है। छोटे बदलाव को एंटीजेनिक ड्रिफ्ट कहा जाता है, जो आमतौर पर हर साल या एक-दो साल में हो सकता है। वहीं बड़े बदलाव को एंटीजेनिक शिफ्ट कहते हैं। नया स्ट्रेन तेजी से फैलने पर बड़े संक्रमण या महामारी की स्थिति बन सकती है। एंटीजन में बदलाव के कारण शरीर की पहले से बनी प्रतिरोधक क्षमता वायरस को हर बार प्रभावी ढंग से पहचान नहीं पाती। इसी वजह से फ्लू अलग-अलग सीजन में दोबारा फैल सकता है।
हर सीजन अपडेट होती है फ्लू वैक्सीन
वायरस के बदलते स्वरूप को देखते हुए फ्लू वैक्सीन की संरचना भी समय-समय पर अपडेट की जाती है। एक बार टीका लगवाने से जीवनभर सुरक्षा नहीं मिलती। मौजूदा स्थिति में खासकर गंभीर बीमारी के जोखिम वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
आमतौर पर फ्लू में बुखार, खांसी, गले में दर्द, बदन दर्द और थकान होती है। कुछ मामलों में इलाज न कराने या पहले से गंभीर फेफड़ों की बीमारी होने पर निमोनिया हो सकता है। सांस लेने में परेशानी, लगातार बढ़ता बुखार या बिगड़ती हालत दिखे तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
हाई रिस्क लोगों के लिए वैक्सीन फायदेमंद
डॉ. कौल के अनुसार इन्फ्लूएंजा की वैक्सीन उपलब्ध है। हाई रिस्क लोगों में इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि संक्रमण होने पर गंभीर बीमारी और जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।
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