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पीपलकोटी हादसे के बाद अब तपोवन विष्णुगाड टनल में वॉटर लीक से खतरा

by | Aug 17, 2026 | News Story

Tapovan Vishnugad Tunnel: उत्तराखंड के चमोली जिले में जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी टनल निर्माण गतिविधियों के दौरान लगातार सामने आ रही घटनाओं ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक ओर टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टेल रेस टनल में मलबा और पानी घुसने के बाद श्रमिकों के फंसने की घटना सामने आई, वहीं अब एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में कैविटी बनने और पानी के रिसाव की जानकारी सामने आई है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के कारण परियोजनाओं में काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा और टनल निर्माण की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

तपोवन-विष्णुगाड टनल में बनी कैविटी

जानकारी के मुताबिक, एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की मुख्य टनल के चोरमी एडिट टनल स्थित डीबीएम साइट पर 15 अगस्त की सुबह टनलिंग के दौरान कैविटी बनने की घटना सामने आई। कैविटी यानी चट्टान या मिट्टी के भीतर अचानक खाली स्थान या छेद बन जाना। इसके साथ ही टनल में पानी के रिसाव की बात भी सामने आई है। घटना के बाद निर्माण स्थल पर स्थिति का जायजा लिया गया और आवश्यक सुरक्षा उपायों पर ध्यान दिया गया। एनटीपीसी प्रबंधन की ओर से इसे फिलहाल टनल निर्माण के दौरान सामने आने वाली परिस्थितियों में से एक बताया गया है। प्रबंधन का कहना है कि टनलिंग के दौरान छोटी कैविटी बनना असामान्य नहीं है और हर कैविटी का मतलब किसी बड़े खतरे से नहीं होता। हालांकि, ऐसी स्थिति में लगातार निगरानी और समय पर तकनीकी आकलन बेहद जरूरी माना जाता है।

पीपलकोटी टनल हादसे के बाद सामने आई दूसरी घटना

तपोवन-विष्णुगाड में यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब चमोली की ही विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टेल रेस टनल में अचानक मलबा और पानी घुसने से कई श्रमिक अंदर फंस गए थे। इसके बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया और फंसे हुए श्रमिकों को बाहर निकालने के प्रयास किए गए। पीपलकोटी की घटना ने पहले ही टनल निर्माण में सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी। ऐसे में कुछ ही समय बाद दूसरी जलविद्युत परियोजना की टनल में कैविटी और पानी के रिसाव की घटना ने चिंता को और बढ़ा दिया है।

हिमालयी क्षेत्र में टनल निर्माण बड़ी चुनौती

उत्तराखंड का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी और भौगोलिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। हिमालयी क्षेत्र में चट्टानों की प्रकृति, भूमिगत जलधाराएं और भूगर्भीय परिस्थितियां टनल निर्माण को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। निर्माण के दौरान किसी हिस्से में चट्टान कमजोर होने, खाली स्थान बनने या पानी का रास्ता मिलने जैसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं। इसी वजह से टनल निर्माण में लगातार भूगर्भीय जांच, पानी के प्रवाह की निगरानी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी संभावित जोखिम की समय रहते पहचान होने से बड़े हादसे की आशंका को कम किया जा सकता है।

लगातार घटनाओं के बीच सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा

तपोवन-विष्णुगाड परियोजना में कैविटी और पानी रिसने की घटना को फिलहाल किसी बड़े हादसे के रूप में नहीं देखा जा रहा है, लेकिन पीपलकोटी की हालिया घटना के बाद इसकी गंभीरता जरूर बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, टनल में कैविटी का बनना अपने आप में हमेशा बड़े खतरे का संकेत नहीं होता, लेकिन यदि ऐसी संरचनात्मक स्थितियों की समय रहते पहचान और निगरानी न हो तो जोखिम बढ़ सकता है।

जलविद्युत परियोजनाएं देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके निर्माण के दौरान काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। चमोली में लगातार सामने आ रही टनल से जुड़ी घटनाएं इस बात की ओर भी ध्यान दिलाती हैं कि हिमालयी क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों, भूगर्भीय निगरानी और आपातकालीन तैयारियों को लगातार मजबूत रखना बेहद जरूरी है।

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