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MP News: देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर एक बार फिर सुर्खियों में है। मध्य प्रदेश का यह शहर अब न सिर्फ सफाई का प्रतीक बन चुका है, बल्कि देशभर के राज्यों के लिए एक ‘लाइव क्लासरूम’ भी बन गया है। इसी क्रम में असम राज्य की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) के प्रतिनिधि दल ने हाल ही में इंदौर का दौरा किया और यहां के सफाई एवं वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल का बारीकी से अध्ययन किया।
मध्य प्रदेश का इंदौर शहर आज पूरे देश के लिए स्वच्छता का प्रतीक बन चुका है। लगातार आठ वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर रहने वाला इंदौर अपने अनोखे “इंदौर मॉडल” की वजह से देशभर में उदाहरण पेश कर रहा है। इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, कचरे का पृथक्करण और जनभागीदारी। हर घर से रोजाना गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र किया जाता है। शहर के सभी कचरा वाहन GPS से जुड़े हैं, जिससे हर रूट की निगरानी होती है।
कचरे को प्रोसेस कर कम्पोस्ट, रीसायकल मटेरियल और बायो-CNG गैस तैयार की जाती है। यह गैस नगर निगम की बसों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती है। इंदौर ने न केवल कचरे को संसाधन में बदला, बल्कि इसे एक राजस्व मॉडल बना दिया। महापौर, प्रशासन और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी ने सफाई को एक अभियान नहीं बल्कि आंदोलन बना दिया है। यही कारण है कि अब असम सहित कई राज्य “इंदौर मॉडल” को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि उनके शहर भी स्वच्छ भारत की इस प्रेरणा को दोहरा सकें।
इंदौर नगर निगम मुख्यालय में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगम आयुक्त दिलीप ठाकुर और अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया ने समिति को शहर की स्वच्छता व्यवस्था का पूरा प्रेजेंटेशन दिया। इसके बाद समिति के सदस्य शहर के विभिन्न इलाकों में गए, जहां उन्होंने कचरा संग्रहण, ट्रांसफर स्टेशन, डोर-टू-डोर वेस्ट सेग्रीगेशन और रिसाइक्लिंग यूनिट की कार्यप्रणाली का मैदानी अवलोकन किया।
असम से आए प्रतिनिधियों ने इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था को 'अभिनव और अनुकरणीय' बताया। उन्होंने कहा कि यह मॉडल न केवल कचरा प्रबंधन में कुशल है, बल्कि इसमें नागरिकों की भागीदारी और तकनीकी नवाचार का उत्कृष्ट संतुलन भी दिखता है। समिति ने यह भी घोषणा की कि असम के प्रमुख शहरों में ‘इंदौर मॉडल’ को अपनाने की दिशा में जल्द कदम उठाए जाएंगे।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस मौके पर कहा, इंदौर की स्वच्छता की सफलता प्रशासन या मशीनों की नहीं, बल्कि जनता की भावना और सहभागिता की कहानी है। यह केवल अभियान नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। उन्होंने बताया कि शहर ने कचरे को संसाधन में बदलने की दिशा में कई नवाचार किए हैं, जैसे कि बायो-सीएनजी उत्पादन, प्लास्टिक वेस्ट से ईंधन निर्माण और सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देना।
असम समिति के सदस्यों ने कहा कि वे इंदौर के इस मॉडल को अपने राज्य के शहरी निकायों में लागू करेंगे, ताकि वहां भी स्वच्छता को जन आंदोलन का रूप दिया जा सके। इंदौर की यह उपलब्धि न केवल शहर के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह प्रमाण भी है कि जब जनता और प्रशासन साथ आएं, तो कोई भी शहर भारत का “क्लीन कैपिटल” बन सकता है।
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