Noida Engineer Yuvraj Mehta
Noida Engineer Yuvraj Mehta: उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की खामोशी से जन्मी त्रासदी बन चुकी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, परत-दर-परत चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा खुलासा यह है कि जिस खतरे ने युवराज की जान ली, उसकी चेतावनी प्रशासन को दो साल पहले ही लिखित रूप में दी जा चुकी थी लेकिन फाइलें चलती रहीं, जमीन पर कुछ नहीं हुआ।
साल 2023 में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने नोएडा अथॉरिटी को सेक्टर-150 को लेकर एक आधिकारिक पत्र भेजा था। इसमें साफ लिखा था कि इलाके में लगातार जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले सकती है और अतिरिक्त पानी निकालने के लिए हेड रेगुलेटर का निर्माण जरूरी है। यह हेड रेगुलेटर बारिश और नालों का पानी सीधे हिंडन नदी तक पहुंचा सकता था। लेकिन यह चेतावनी कागज़ों में दबी रह गई। न तो हेड रेगुलेटर बना, न जल निकासी सुधरी।
युवराज की कार जिस स्थान पर गिरी, वह कोई सामान्य सड़क नहीं थी। वह एक निर्माणाधीन व्यावसायिक परिसर का तहखाना था, जिसे खोदकर लगभग 50 फीट गहरा गड्ढा बना दिया गया था। बारिश, आसपास की सोसाइटियों के नालों और निकासी बंद होने के कारण यह गड्ढा धीरे-धीरे झील में बदल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर हेड रेगुलेटर बन गया होता तो पानी यहां जमा ही नहीं होता।
शनिवार सुबह घने कोहरे में युवराज अपनी कार से जा रहे थे। सड़क किनारे कोई बैरिकेड नहीं था, कोई चेतावनी नहीं। कार फिसली और सीधे पानी से भरे उस गहरे गड्ढे में समा गई। कुछ ही मिनटों में सब खत्म हो गया। 27 साल का एक युवा इंजीनियर सिस्टम की लापरवाही का शिकार हो गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिंचाई विभाग के पत्र में साफ लिखा था कि परियोजना के लिए बजट भी तय था। इसके बावजूद काम कभी शुरू नहीं हुआ। वजह? अफसरों की लापरवाही, फाइलों की सुस्ती और जिम्मेदारी से बचने की पुरानी बीमारी।
घटना के बाद गुस्साए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। नोएडा अथॉरिटी ने निर्माण स्थल पर बैरिकेड लगवाए लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पुलिस ने दो रियल एस्टेट डेवलपर्स विशटाउन प्लानर्स और लोटस ग्रीन्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। वहीं, यूपी सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए SIT गठित करने का आदेश दिया है।
युवराज के पिता राजकुमार मेहता का सवाल सीधा है अगर 2023 की चिट्ठी पर काम हो जाता, तो क्या उनका बेटा आज जिंदा नहीं होता? वे सिर्फ न्याय नहीं, बल्कि जवाबदेही चाहते हैं।
दो दिन के विरोध के बाद नोएडा प्रशासन ने सुरक्षा इंतजाम शुरू किए हैं। लेकिन सेक्टर-150 के लोग कहते हैं कि वे महीनों से जलभराव, खुले गड्ढों और सुरक्षा की कमी की शिकायत कर रहे थे कोई सुनने वाला नहीं था। यह हादसा एक चेतावनी है कि जब फाइलें ज़मीन से ऊपर चलती हैं और ज़मीन पर कुछ नहीं होता, तब कीमत किसी मासूम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। युवराज की मौत सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का सबूत है।
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