संयुक्त अरब अमीरात यानी United Arab Emirates ने एक बार फिर पाकिस्तान से जुड़े लोगों पर बड़ी कार्रवाई की है। मीडिया रिपोर्ट्स और सामने आ रही जानकारियों के मुताबिक दुबई और अबू धाबी में करीब 2 हजार पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं।
बताया जा रहा है कि इनमें से कई लोगों को नियमों के उल्लंघन, अवैध गतिविधियों और दस्तावेज संबंधी गड़बड़ियों के आरोप में देश छोड़ने के आदेश दिए गए। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य वस्तुएं भी जब्त की गई हैं। इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार यूएई प्रशासन पिछले कुछ समय से विदेशी नागरिकों के दस्तावेज, वीजा रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों की जांच कर रहा था। इसी जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जिनमें वीजा नियमों का उल्लंघन, अवैध कारोबार, फर्जी दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी जैसी बातें सामने आईं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों और इमिग्रेशन विभाग ने संयुक्त अभियान चलाया। इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर पाकिस्तानी नागरिकों पर पड़ा।
रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि जांच के दौरान कई लोगों के बैंक रिकॉर्ड और नकदी की भी जांच की गई। कुछ मामलों में अधिकारियों ने नकद रकम जब्त की, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने कब्जे में लिए, संदिग्ध दस्तावेज सीज किए हालांकि यूएई प्रशासन की ओर से हर मामले की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन कार्रवाई को लेकर गल्फ देशों में काम कर रहे प्रवासियों के बीच चिंता बढ़ गई है।
पिछले कुछ वर्षों में यूएई ने अपने सुरक्षा कानून और इमिग्रेशन नियम काफी सख्त किए हैं।
देश की कोशिश है कि:
अवैध आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगे, आतंकी फंडिंग पर नियंत्रण हो, नकली दस्तावेजों के नेटवर्क खत्म किए जाएं, विदेशी कामगारों का रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी रहे। इसी वजह से कई देशों के नागरिकों पर समय-समय पर कार्रवाई होती रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यूएई अब अपनी वैश्विक छवि को सुरक्षित और निवेश-अनुकूल देश के रूप में और मजबूत करना चाहता है।
Pakistan के लाखों नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों में है। विदेशों में काम करने वाले पाकिस्तानी नागरिकों से आने वाला पैसा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों पर कार्रवाई होने से रोजगार पर असर पड़ सकता है, विदेशों में पाकिस्तान की छवि प्रभावित हो सकती है,नए वीजा नियम और सख्त हो सकते हैं, आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण पाकिस्तान में इस मुद्दे को गंभीरता से देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ यूएई ही नहीं, बल्कि पूरे गल्फ क्षेत्र में विदेशी नागरिकों के रिकॉर्ड और गतिविधियों की निगरानी पहले से ज्यादा बढ़ गई है। खासतौर पर बैंकिंग लेनदेन, वीजा स्टेटस, नौकरी संबंधी दस्तावेज, ऑनलाइन गतिविधियां, पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
इसका मकसद सुरक्षा और आर्थिक अपराधों पर नियंत्रण बनाए रखना है।
यह कार्रवाई सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित मुद्दा नहीं मानी जा रही। गल्फ देशों में रहने वाले दूसरे देशों के नागरिकों के लिए भी यह एक बड़ा संदेश है कि वहां के कानूनों और नियमों का सख्ती से पालन करना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में काम करने वाले लोगों को अपने दस्तावेज, वीजा और वित्तीय रिकॉर्ड पूरी तरह सही रखने चाहिए ताकि किसी कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े।
यूएई द्वारा दुबई और अबू धाबी में पाकिस्तानी नागरिकों पर की गई कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि गल्फ देश अब सुरक्षा, इमिग्रेशन और वित्तीय नियमों को लेकर किसी तरह की ढील देने के मूड में नहीं हैं। करीब 2 हजार लोगों पर हुई कार्रवाई और सामान-पैसे जब्त होने की खबरों ने पाकिस्तान में चिंता बढ़ा दी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार और यूएई के बीच क्या बातचीत होती है और इसका प्रवासी समुदाय पर कितना असर पड़ता है।
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