UPI Transaction Charges Update: डिजिटल भुगतान के सबसे लोकप्रिय माध्यम UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। सरकार ने साफ किया है कि आम उपभोक्ताओं को UPI के जरिए भुगतान करने पर किसी प्रकार का ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं देना होगा। इससे करोड़ों UPI यूजर्स को राहत मिली है, जो हाल के दिनों में संभावित शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं को लेकर चिंतित थे।
P2P ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ्री रहेंगे
वित्त मंत्रालय के अनुसार, व्यक्ति से व्यक्ति (Person-to-Person) होने वाले सभी UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। यानी यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार, दोस्तों या अन्य लोगों को UPI के माध्यम से पैसे भेजता है, तो उस पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। सरकार ने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के लिए यह व्यवस्था जारी रखी जाएगी।
अधिकांश मर्चेंट पेमेंट पर भी नहीं लगेगा शुल्क
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि UPI के जरिए होने वाले अधिकांश व्यापारिक भुगतान (Merchant Transactions) पर भी कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। यानी दुकानों, रेस्तरां, ऑनलाइन सेवाओं और अन्य सामान्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों को फिलहाल कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा।
सीमित कारोबारियों पर लागू हो सकता है MDR
हालांकि, सरकार ने संकेत दिया है कि UPI प्रणाली की दीर्घकालिक स्थिरता और संचालन लागत को ध्यान में रखते हुए भविष्य में कुछ चुनिंदा बड़े व्यापारिक लेनदेन पर मामूली मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जा सकता है। यह शुल्क आम ग्राहकों पर नहीं बल्कि उन चुनिंदा व्यापारियों पर लागू हो सकता है, जिनके ट्रांजैक्शन तय सीमा से अधिक होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और यदि भविष्य में ऐसा कदम उठाया जाता है तो उसका दायरा सीमित रहेगा।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने पर जोर
पिछले कुछ वर्षों में UPI भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक संस्थानों तक, हर स्तर पर इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है। सरकार का मानना है कि UPI ने नकदी पर निर्भरता कम करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी वजह से सरकार आम उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डालना चाहती।
कारोबारियों और फिनटेक सेक्टर की नजर
UPI से जुड़े संभावित MDR मॉडल पर बैंकिंग और फिनटेक सेक्टर की भी नजर बनी हुई है। कई उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े व्यापारिक लेनदेन पर सीमित शुल्क लगाने से डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन और विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। हालांकि, सरकार ने फिलहाल स्पष्ट कर दिया है कि आम उपयोगकर्ताओं के लिए UPI पहले की तरह निशुल्क रहेगा।
केंद्र सरकार के इस स्पष्टीकरण से यह साफ हो गया है कि UPI उपयोग करने वाले करोड़ों आम लोगों को किसी तरह का ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा। भविष्य में यदि कोई बदलाव होता भी है तो उसका असर मुख्य रूप से चुनिंदा बड़े व्यापारिक लेनदेन पर पड़ सकता है, जबकि सामान्य उपभोक्ता और P2P ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे।
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