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ईरान के खिलाफ बड़े हमले की तैयारी में US? मिडिल ईस्ट में बढ़ाई सैन्य ताकत, 150+ कॉम्बैट मेडिक्स तैनात

US Military Buildup Iran Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य अभियान के बीच मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है। स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेस, एडवांस्ड बॉम्बर्स, युद्धपोत और लड़ाकू मेडिकल टीमों की तैनाती को सामान्य सतर्कता के बजाय बड़े संघर्ष की तैयारी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

स्पेशल फोर्सेस से बॉम्बर्स तक तैनाती

अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेस को क्षेत्र में भेजा जा रहा है, जबकि लड़ाकू स्क्वॉड्रन्स पहले से मौजूद हैं। अमेरिका और ब्रिटेन में तैनात बॉम्बर्स, खासकर ब्रिटेन के B-1 लैंसर, हाई अलर्ट पर हैं। ये विमान भारी हथियार ले जाने और तेज गति से हमला करने में सक्षम हैं। तैनाती से संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान या उसके सहयोगी गुटों के खिलाफ जमीनी अभियान की संभावना भी खुली रख रहा है।

17 युद्धपोत और दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप

अमेरिकी नौसेना की क्षेत्र में मौजूदगी भी बढ़ी है। करीब 17 जहाजों में दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, 11 डिस्ट्रॉयर्स और एक मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट शामिल हैं। यह ताकत रेड सी और फारस की खाड़ी में निगरानी और सैन्य कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण है। हूती विद्रोहियों द्वारा रेड सी में टैंकरों पर हालिया हमलों के बीच CENTCOM ने लगातार 12वें दिन हमलों की पुष्टि की है।

150 से ज्यादा कॉम्बैट मेडिक्स की तैनाती

जर्मनी के लैंडस्टुल मिलिट्री हॉस्पिटल में 150 से अधिक कॉम्बैट-ट्रॉमा विशेषज्ञों की तैनाती को गंभीर संकेत माना जा रहा है। यह अस्पताल मिडिल ईस्ट में घायल अमेरिकी सैनिकों के इलाज का प्रमुख केंद्र है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतनी बड़ी मेडिकल तैयारी सीमित हवाई हमलों के बजाय लंबे या बड़े संघर्ष की आशंका दिखाती है।

95 अरब डॉलर की फंडिंग और बढ़ता तनाव

अमेरिकी कांग्रेस ने 95 अरब डॉलर के फ्रेमवर्क को मंजूरी दी है, जिसमें 73 अरब डॉलर सैन्य और खुफिया फंडिंग के लिए हैं। वोट 216-214 रहा। रिपब्लिकन सांसद फिट्जपैट्रिक ने कहा कि वह सैनिकों की सैलरी के पक्ष में हैं, लेकिन युद्ध का समर्थन नहीं करते।

अगर अमेरिका बड़ा हमला करता है तो रूस और चीन की प्रतिक्रिया अहम होगी और क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ सकता है। तेल कीमतों, शिपिंग रूट्स और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है, जिसका भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों पर भी प्रभाव होगा।

ट्रंप की रणनीति पर सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप निर्णायक कार्रवाई के जरिए संघर्ष जल्दी खत्म करना चाहते हैं। लेकिन स्पेशल फोर्सेस, बॉम्बर्स, नौसेना और मेडिकल टीमों की तैनाती बताती है कि 12 रातों के हवाई हमलों से आगे बड़े ऑपरेशन की तैयारी हो सकती है। इससे ईरान, हूती और अन्य समूहों के साथ तनाव बढ़ने और नए क्षेत्रीय युद्ध का खतरा भी पैदा हो गया है।

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Tanisha Verma

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