तेहरान का पलटवार
Iran-US Tensions: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तेहरान को 10-15 दिन की सख्त डेडलाइन और सीमित सैन्य कार्रवाई के संकेत देने के बाद ईरान ने भी जवाबी रणनीति तेज कर दी है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ परमाणु बातचीत के लिए एक ड्राफ्ट काउंटरप्रपोजल अगले दो से तीन दिनों में तैयार हो सकता है। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव वरिष्ठ ईरानी नेतृत्व के सामने समीक्षा के लिए रखा जाएगा और मंजूरी मिलने पर एक हफ्ते के भीतर आगे की बातचीत संभव है।
यह घटनाक्रम हाल ही में जिनेवा में हुई अप्रत्यक्ष वार्ताओं के बाद सामने आया है, जहां ईरानी प्रतिनिधियों की बातचीत ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके करीबी सहयोगियों से हुई। अराकची ने बताया कि दोनों पक्ष कुछ “गाइडिंग प्रिंसिपल्स” पर सहमत हुए हैं, हालांकि उन्होंने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं कि कोई अंतिम समझौता नज़दीक है।
MS Now को दिए इंटरव्यू में अराकची ने चेतावनी दी कि अगर सैन्य विकल्प अपनाया गया तो कूटनीतिक कोशिशों को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से तेहरान को चेतावनी दी है कि या तो डील करें या “भारी कीमत” चुकाने के लिए तैयार रहें।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान पर दबाव बनाने के लिए सीमित सैन्य हमले के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। Reuters के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा एजेंसियों में ईरान को लेकर सैन्य योजनाएं अब उन्नत चरण में हैं, जिनमें खास ठिकानों और नेतृत्व को निशाना बनाने जैसे विकल्प शामिल हैं।
इस बीच, US Congress अगले हफ्ते ऐसे प्रस्ताव पर वोट कर सकती है, जिससे राष्ट्रपति को सांसदों की मंजूरी के बिना ईरान पर हमला करने से रोका जा सके। इससे अमेरिका के भीतर भी इस संभावित टकराव को लेकर मतभेद साफ दिख रहे हैं।
तनाव के बीच ईरान के भीतर हालात भी अस्थिर बने हुए हैं। एक अमेरिकी मानवाधिकार समूह के अनुसार, हालिया अशांति में हजारों लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि ईरानी सरकार ने इससे कम आंकड़े पेश किए हैं। यह अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ा सकता है।
एक तरफ़ ट्रंप की डेडलाइन और सैन्य चेतावनी, दूसरी तरफ़ ईरान का काउंटरप्रपोजल अगले कुछ दिन तय करेंगे कि यह संकट वार्ता की मेज पर सुलझेगा या टकराव की ओर बढ़ेगा। पूरी दुनिया की निगाहें अब तेहरान और वॉशिंगटन पर टिकी हैं।
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