Maharashtra: महाराष्ट्र के वाशिम की जिला अदालत ने करीब 15 साल पुराने पुलिस हिरासत में मौत के मामले में तत्कालीन रिसोड़ पुलिस स्टेशन के पूर्व थानेदार समेत 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला 10 मई का है, जब पुलिस रात करीब 3 बजे पारधी समाज के बेग्या पवार को पूछताछ के नाम पर उनके घर से ले गई थी।
पुलिस का दावा था कि केवल पूछताछ करनी है, लेकिन थाने में बेग्या पवार की कथित तौर पर बेरहमी से पिटाई की गई, जिससे उनकी हिरासत में ही मौत हो गई। उनके खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और घटना से महज एक साल पहले ही उनकी शादी हुई थी।
शिकायत से लेकर CID जांच तक
बेटे की मौत के बाद उनके बुजुर्ग माता-पिता शिकायत दर्ज कराने रिसोड़ थाने पहुंचे, लेकिन जिस तत्कालीन थानेदार का नाम शिकायत में था, उसने केस दर्ज करने से इनकार कर दिया। बेग्या पवार के पारधी समाज से होने के कारण इस घटना के विरोध में प्रदर्शन और मोर्चे भी निकाले गए। बाद में मेडिकल जांच में उनके शरीर की कई हड्डियां टूटी होने की पुष्टि हुई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CID अधिकारी अनवर शेख को सौंपी गई। उन्होंने विस्तृत जांच के बाद अदालत में मजबूत चार्जशीट दाखिल की, जिसमें पुलिस हिरासत में हुई मारपीट का पूरा विवरण शामिल था।
अदालत का फैसला
15 साल तक चली सुनवाई के बाद वाशिम जिला सत्र अदालत के जस्टिस झपाटे ने तत्कालीन थानेदार महादेव माणिक धांडे समेत सभी 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई। इनमें थानेदार सहित दो पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। फैसले के बाद सभी दोषियों को वाशिम जेल भेज दिया गया, जहां से औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें अमरावती सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया जाएगा।
मां ने कहा- मेरे बेटे पर एक भी केस नहीं था
मृतक की मां कलाबाई नयनु पवार ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि 15 साल बाद उनके परिवार को न्याय मिला है। उन्होंने सरकारी वकील श्रीराम कालू, जस्टिस झपाटे और CID अधिकारी अनवर शेख का आभार जताया। उनका कहना था कि उनके बेटे पर एक भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं था, फिर भी पुलिस उसे रात में पूछताछ के नाम पर ले गई और सुबह उसकी मौत की खबर मिली।
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