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Yamuna Flood : उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब मैदानी इलाकों पर भी साफ नजर आने लगा है। पहाड़ों में तेज वर्षा के चलते हरियाणा स्थित हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में लगातार 42 से 45 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसी का नतीजा है कि जेवर क्षेत्र में यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है और रविवार को आधा दर्जन से अधिक गांवों की हजारों बीघा फसलें जलमग्न हो गईं।
ग्रामीणों के अनुसार, पुश्ता के अंदर धान, सब्जी और पशुओं के चारे की फसलों में भारी नुकसान हुआ है। किसानों को सबसे अधिक चिंता इस बात की है कि शनिवार और रविवार को छोड़ा गया पानी मंगलवार तक जेवर पहुंचेगा। ऐसे में पहले से ही डूबी हुई फसलों के पूरी तरह से बर्बाद होने का खतरा मंडरा रहा है। यमुना के उफान का असर जेवर के कानीगढ़ी, गोविंदगढ़, पूरन नगर, शमशमनगर, छोटा झुप्पा और झुप्पा गांव में सबसे अधिक देखा जा रहा है। यहां नदी अपनी मुख्य धारा से निकलकर खेतों में घुस आई है। रविवार को जैसे-जैसे जलस्तर बढ़ता गया, किसानों की धान और ज्वार की फसलों के साथ लौकी, काशीफल और परमल की फसलें भी पानी में डूब गईं।
स्थानीय किसानों ने बताया कि शनिवार रात अचानक जलस्तर बढ़ने से खेतों में पानी भरना शुरू हो गया। रविवार सुबह तक स्थिति और बिगड़ गई। “पुश्ता के अंदर लगभग सभी फसलें डूब चुकी हैं। अगर बैराज से छोड़ा गया पानी मंगलवार तक यहां पहुंचा तो हमारी बची-खुची फसल भी खत्म हो जाएगी,” एक किसान ने बताया।
बैराज से शनिवार और रविवार को लगभग 45,736 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। प्रशासन को आशंका है कि यह पानी मंगलवार तक जेवर पहुंचकर और संकट गहरा सकता है। बाढ़ का पानी पहले ही झुप्पा से लेकर कानीगढ़ी गांव तक पुश्ता के किनारे-किनारे पहुंच चुका है। यदि पानी की मात्रा और बढ़ी तो पुश्ता के भीतर की फसलें पूरी तरह से डूब जाएंगी। हालांकि राहत की बात यह है कि जेवर क्षेत्र में यमुना नदी पर पुश्ता बने होने के कारण आबादी को किसी तरह का सीधा खतरा नहीं है। फिर भी प्रशासन ने एहतियातन सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है।
जेवर के उपजिलाधिकारी अभय कुमार सिंह ने बताया, “यमुना नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ चौकियों को सतर्क किया गया है। किसानों की कुछ फसलें जरूर प्रभावित हुई हैं, लेकिन अभी स्थिति नियंत्रण में है। यदि जलस्तर और बढ़ता है तो प्रशासन राहत और बचाव कार्य के लिए पूरी तरह तैयार है।”
लगातार हो रही बरसात और पहाड़ी नदियों के उफान के चलते जेवर के किसानों के सामने संकट और गहरा गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मंगलवार तक यमुना का जलस्तर किस हद तक पहुंचता है और क्या किसानों की उम्मीदें पूरी तरह डूब जाएंगी।
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