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पश्चिम बंगाल के मिड-डे मील से अंडे हटाने पर विवाद, ISKCON के साथ नई योजना पर विपक्ष का हमला

West Bengal: पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने अपने पहले बजट में कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत ISKCON के सहयोग से शाकाहारी मिड-डे मील शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत भोजन में अंडे शामिल नहीं होंगे। हालांकि, प्राथमिक विद्यालयों के लिए प्रति छात्र सामग्री लागत 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दी गई है। योजना लागू करने के लिए ISKCON को रसोई और लॉजिस्टिक व्यवस्था तैयार करने में एक-दो महीने लग सकते हैं।

विपक्ष का विरोध

विपक्षी नेताओं ने इसे बंगाल की खाद्य संस्कृति पर हमला बताया। नेता प्रतिपक्ष रितब्रत बनर्जी ने कहा कि बंगाली बच्चों के भोजन में लंबे समय से पशु प्रोटीन शामिल रहा है। वहीं डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि सरकार बच्चों से पोषण छीनकर शाकाहार थोप रही है।

ISKCON और शिक्षकों की राय

ISKCON के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने बताया कि संस्था पिछले दो दशकों से आठ राज्यों के 20 से अधिक शहरों में करीब 12 लाख छात्रों को भोजन उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि मेन्यू स्थानीय स्वाद के अनुसार तैयार होगा, जिसमें चावल, दाल, खिचड़ी, सब्जी, सोया और राजमा जैसे प्रोटीन स्रोत शामिल होंगे।
वहीं कई शिक्षकों ने चिंता जताई कि अंडे बच्चों की पसंद होने के साथ उनकी उपस्थिति बढ़ाने में भी मदद करते थे। कुछ शिक्षकों का मानना है कि नई व्यवस्था भोजन की गुणवत्ता से अधिक खान-पान की आदतों को बदलने की कोशिश जैसी लगती है। साथ ही, स्कूलों में भोजन बनाने वाली स्थानीय महिला रसोइयों की आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

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