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ईरान के Warship आईरिस लावन को भारत ने क्यों दी शरण? विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया बड़ा खुलासा

IRIS Lavan docking India: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि ईरानी युद्धपोत आईरिस लावन को भारत के कोच्चि बंदरगाह में डॉक करने की अनुमति मानवतावादी आधार पर दी गई थी। यह जहाज तकनीकी खराबी के कारण पहले कोच्चि में आया था। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत ने यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के सिद्धांतों के तहत उठाया। उन्होने बताया कि आईआरआईएस लावन फरवरी 2026 में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा और मिलान में भाग लेने के लिए क्षेत्र में था। भारत ने 1 मार्च को डॉकिंग की मंजूरी दी और जहाज के 183 चालक दल के सदस्य वर्तमान में नौसेना सुविधाओं में सुरक्षित हैं।

तकनीकी खराबी और सुरक्षा

जयशंकर ने कहा कि जहाज परिस्थितियों के विपरीत फंस गया था और उसे मदद की आवश्यकता थी। “जब यह जहाज आना चाहता था, और वह भी मुश्किल में था, तो यह मानवीय कार्य था,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जहाज पर कई युवा कैडेट थे, जिन्हें सुरक्षित तरीके से सुविधा केंद्र में रखा गया।

आईरिस देना की घटना

आईरिस देना के डूबने से कुल 87 लोगों की मौत हुई थी। इस जहाज पर भारी तोपें, सतह-से-हवा मिसाइलें, जहाज विरोधी मिसाइलें, टॉरपीडो और हेलीकॉप्टर मौजूद थे। हालांकि ईरान के उप विदेश मंत्री सैय्यद ख़तीबज़ादेह ने कहा कि आईरिस देना वापसी के समय निहत्था और खाली था। भारतीय नौसेना ने कोलंबो स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (MRCC) से संकटकालीन सूचना मिलने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया और श्रीलंका के नेतृत्व में समुद्री गश्ती विमान तैनात किया।

हिंद महासागर की वास्तविकता

जयशंकर ने कहा कि हिंद महासागर की रणनीतिक वास्तविकताओं को समझना जरूरी है। उन्होंने बताया कि डिएगो गार्सिया पिछले पांच दशकों से मौजूद है, जिबूती में विदेशी सेनाओं की मौजूदगी पहले दशक की शुरुआत में स्थापित हुई और हंबनटोटा भी इसी अवधि में विकसित हुआ।

व्यापारिक जहाजों और भारतीयों की सुरक्षा

विदेश मंत्री ने व्यापारिक जहाजों पर काम कर रहे भारतीय कर्मचारियों की सुरक्षा पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कई जानें गई हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि हमारे लोगों और व्यापारिक हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

रणनीतिक दृष्टिकोण

जयशंकर ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में 9-10 मिलियन लोग रहते हैं, जिनका कल्याण और सुरक्षा उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि व्यापारिक समुद्री क्षेत्र का संरक्षण। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की नीतियां आर्थिक, ऊर्जा और सामरिक हितों के साथ-साथ मानवीय हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।

Yas Pal

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