Rahul Gandhi AI protest: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने 20 फरवरी को दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान युवा कांग्रेस के शर्टलेस विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को बब्बर शेर बताया और इस घटना को भारत में तकनीकी और व्यापारिक नीतियों पर केंद्रित बहस का हिस्सा कहा। गांधी ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने एआई डेटा और संबंधित निर्णयों को अमेरिका को सौंपकर देश को धोखा दिया है।
गांधी ने दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हाल ही में हमने एआई शिखर सम्मेलन आयोजित किया। युवा कांग्रेस वालों ने कर दिया। प्रधानमंत्री एआई के बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने सारा डेटा अमेरिका को दे दिया और देश को धोखा दिया।
20 फरवरी को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में युवा कांग्रेस के कुछ सदस्य बिना शर्ट पहने हॉल में प्रवेश कर गए। उनका विरोध प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ था। कांग्रेस का दावा है कि यह समझौता किसानों के अधिकारों का बलिदान करता है। इस विरोध प्रदर्शन में लगभग 14 युवा कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार किया गया, जिनमें अध्यक्ष उदय भानु चिब भी शामिल थे।
इस नाटकीय प्रदर्शन ने देश भर में राजनीतिक बहस को जन्म दिया। कांग्रेस ने इसे सरकार की नीतियों के विरोध के रूप में पेश किया, जबकि बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर अपमानजनक करार दिया।
बीजेपी ने राहुल गांधी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विरोध प्रदर्शन किसी सुनियोजित योजना का हिस्सा था। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि गांधी की टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि यह कार्यकर्म कांग्रेस सांसदों द्वारा आयोजित एक सुनियोजित प्रयोग था, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक मंच पर शर्मिंदा करना था।
बीजेपी ने गांधी पर पलटवार करते हुए 1950 के दशक का नेहरू प्रकरण याद दिलाया। अमित मालवीय ने बताया कि महाराजा यशवंतराव होलकर द्वितीय की मृत्यु के बाद उनके अमेरिका में जन्मे पुत्र रिचर्ड को होल्कर वंश की विरासत मिलने को लेकर बहस छिड़ गई थी। तत्कालीन सरकार ने विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया कि सिंहासन का उत्तराधिकारी भारतीय माता से जन्मा बच्चा होना चाहिए। परिणामस्वरूप, महाराजा की भारतीय पत्नी से जन्मी पुत्री उषा देवी राजे साहिब को होल्कर वंश की उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता दी गई।
मालवीय ने इस प्रकरण का उदाहरण देते हुए कहा, “राष्ट्रीय पहचान और निष्ठा अमूर्त विचार नहीं थे; वे मूल और अपनेपन में गहराई से निहित थे। राहुल गांधी ने इसे नजरअंदाज किया है।”
इस घटना ने भारत में राजनीतिक और राष्ट्रीय पहचान पर बहस को बढ़ा दिया है। कांग्रेस इसे सरकार की नीतियों के विरोध और किसानों के हितों की रक्षा के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि बीजेपी इसे राष्ट्रीय गौरव और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला बता रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में विपक्ष और सरकार के बीच बहस का नया मंच तैयार कर सकता है। गांधी का बयान और बीजेपी की प्रतिक्रिया दोनों ही राजनीतिक दृष्टिकोण और जनता के मनोबल को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
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