Thursday, Sep 03

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मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के बाद 90 अमेरिकी नेताओं ने RSS का चंदा स्वीकार करने से किया इंकार

RSS-linked donations US politicians: अमेरिका में 90 नेताओं और चुनावी उम्मीदवारों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े व्यक्तियों या संस्थाओं से किसी भी तरह का राजनीतिक चंदा स्वीकार न करने का संकल्प लिया है। इनमें भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना और प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं। यह अभियान RSS प्रमुख मोहन भागवत के 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 'Universal Oneness Celebration' कार्यक्रम में शामिल होने के कुछ दिनों बाद शुरू हुआ।

31 अगस्त को Hindus for Human Rights Action और SACRED Acts ने यह छह पन्नों का संकल्प जारी किया। इसमें डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के संघीय, राज्य और स्थानीय स्तर के नेता शामिल हैं। आठ राज्यों के नेताओं ने RSS से जुड़े पुराने चंदे को लौटाने या लोकतंत्र समर्थक संगठनों को देने की बात भी कही है।

कौन-कौन से नेता शामिल?

हस्ताक्षर करने वालों में अमेरिकी कांग्रेस सदस्य, राज्य विधायक, मेयर और स्थानीय नेता शामिल हैं। प्रमुख नामों में मिशिगन के सीनेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद, वॉशिंगटन की सांसद प्रमिला जयपाल, कैलिफोर्निया के सांसद रो खन्ना और इलिनॉय की सांसद रॉबिन केली शामिल हैं। जयपाल ने RSS को दक्षिणपंथी संगठन बताते हुए कहा कि वह भारत में लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश करता है। वहीं रो खन्ना ने RSS को महात्मा गांधी की हत्या के पीछे का संगठन बताते हुए कहा कि उसे अमेरिका के चुनावों को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने RSS से जुड़े एक समर्थक द्वारा दिए गए 6,600 डॉलर के चंदे को वापस दान करने की घोषणा की। हालांकि, The Nation की 2023 की रिपोर्ट में खन्ना को अमेरिकी हिंदू राष्ट्रवादी नेताओं से 1.10 लाख डॉलर मिलने की बात कही गई थी।

भागवत के दौरे के बाद तेज हुआ विवाद

यह अभियान भागवत के अमेरिकी दौरे के जवाब में शुरू हुआ। न्यूयॉर्क में उनके कार्यक्रम का आयोजन American Hindus for Engagement and Dialogue (AHEAD Forum) ने RSS के शताब्दी वर्ष के अंतरराष्ट्रीय आउटरीच के तहत किया था। कार्यक्रम से पहले US Commission on International Religious Freedom ने RSS पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए प्रतिबंधों की मांग की थी। न्यूयॉर्क के भारतीय मूल के डेमोक्रेट मेयर जोहरान ममदानी ने भी RSS को 'बहिष्कारी' संगठन बताते हुए कार्यक्रम का विरोध किया था, हालांकि उन्होंने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

हिंदू अमेरिकी संगठनों ने जताई आपत्ति

इस अभियान पर Hindu American Political Action Committee (HAPAC) ने कड़ा विरोध जताया। संगठन ने इसे 'एंटी-हिंदू' और भेदभावपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि कुछ नेताओं को गुमराह या दबाव में लाकर हस्ताक्षर करवाए गए। HAPAC का कहना है कि अभियान केवल हिंदू अमेरिकी दानदाताओं को निशाना बना रहा है और उनसे 'वफादारी साबित करने' की अपेक्षा कर रहा है। वहीं Hindu American Foundation की कार्यकारी निदेशक सुहाग ए. शुक्ला ने इसे 'अन-अमेरिकन' बताया। उनका आरोप है कि करीब 100 उम्मीदवार हिंदू अमेरिकी नागरिकों के चंदे की जांच सिर्फ इसलिए करना चाहते हैं कि कहीं उनका RSS से संबंध तो नहीं है। उन्होंने इसे हिंदू अमेरिकी समुदाय के साथ अलग व्यवहार और विदेशी संस्था के प्रति कथित दोहरी वफादारी मानने वाला कदम बताया।

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