AI E-Waste: दुनिया में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग मशीनों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इन उपकरणों की उम्र पूरी होने के बाद उनसे निकलने वाला कचरा नई चुनौती बन सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 से 2050 के बीच AI से जुड़े 39.5 करोड़ से 61.7 करोड़ टन इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस्तेमाल से बाहर हो सकते हैं। 2050 तक अकेले AI से हर साल 3.1 करोड़ से 4.6 करोड़ टन ई-कचरा निकलने का अनुमान है।
इस अनुमान में केवल AI सर्वर और चिप ही शामिल नहीं हैं। डेटा सेंटर के नेटवर्किंग और स्टोरेज उपकरण, बिजली व्यवस्था, बैटरी, ट्रांसफॉर्मर और कूलिंग सिस्टम भी समय के साथ पुराने होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक हर साल 86 लाख से 1.31 करोड़ टन AI से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस्तेमाल से बाहर हो सकते हैं। यह पुराने अनुमानों से करीब 40-60 गुना अधिक है।
पहले के आकलनों में मुख्य रूप से सर्वर और GPU जैसे उपकरणों को गिना जाता था। नए अनुमान में AI इंफ्रास्ट्रक्चर के दूसरे जरूरी हिस्सों को भी शामिल किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक सर्वर, एक्सेलरेटर और रैक पूरे इलेक्ट्रोमैकेनिकल ढांचे के वजन का करीब 13 फीसदी हैं। बाकी 87 फीसदी में बिजली, नेटवर्किंग, स्टोरेज, ट्रांसफॉर्मर, बैटरी, बैकअप और कूलिंग सिस्टम आते हैं।
अगस्त 2026 तक 179 देशों में 12,259 डेटा सेंटर थे। इनमें अमेरिका में 5,388, जर्मनी में 529 और ब्रिटेन में 523 डेटा सेंटर हैं। मैकिन्से के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025-2030 के बीच AI इंफ्रास्ट्रक्चर में करीब 7 ट्रिलियन डॉलर निवेश हो सकता है।
AI का असर केवल डेटा सेंटर तक सीमित नहीं रहेगा। कंप्यूटर, मोबाइल, एज डिवाइस और टेलीकॉम उपकरण भी नई तकनीक आने पर जल्दी बदले जा सकते हैं। अनुमान है कि 2050 तक डेटा सेंटर के बाहर से हर साल 1.62 करोड़ से 3.07 करोड़ टन अतिरिक्त ई-कचरा निकल सकता है।
रिपोर्ट में PFAS जैसे रसायनों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इनमें से कई पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं, इसलिए इन्हें ‘फॉरएवर केमिकल्स’ कहा जाता है। पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सही रिसाइक्लिंग नहीं होने पर इनमें मौजूद रसायन पर्यावरण के लिए खतरा बन सकते हैं।
दुनिया पहले ही ई-कचरे की समस्या से जूझ रही है। ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर के अनुसार 2022 में करीब 6.2 करोड़ टन ई-कचरा पैदा हुआ था, जिसमें केवल 22.3 फीसदी औपचारिक रूप से कलेक्ट और रिसाइकिल किया गया।
रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार सामान्य और AI से जुड़े अतिरिक्त कचरे को मिलाकर 2050 तक सालाना 19.6 करोड़ से 21.1 करोड़ टन ई-कचरा पैदा हो सकता है। ऐसे में पुराने सर्वर, कंप्यूटर, बैटरी और नेटवर्किंग उपकरणों को लंबे समय तक इस्तेमाल करने, दोबारा उपयोग में लाने और सही तरीके से रिसाइकिल करने की व्यवस्था जरूरी होगी।
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