Sunday, Sep 13

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आतंकवाद से लेकर परमाणु खतरे तक, BRICS घोषणा में क्या-क्या? जानें बड़े फैसले

BRICS Summit 2026: तीन साल पहले भारत ने G20 शिखर सम्मेलन में सभी सदस्य देशों से सहमति वाला साझा घोषणापत्र मंजूर कराया था। अब BRICS में भी भारत ने ऐसा ही किया। गहरे मतभेदों के बावजूद सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणा 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया। UAE और ईरान के बीच मध्य पूर्व संघर्ष को लेकर मतभेदों के कारण देर रात तक बातचीत चली। घोषणा में आतंकवाद, टैरिफ, परमाणु जोखिम और विवादों के कूटनीतिक समाधान जैसे मुद्दे शामिल रहे।

शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन घोषणा को मंजूरी मिलना भारत के कूटनीतिक प्रभाव को दिखाता है। पीएम मोदी के घोषणा की जानकारी देने पर चीन के शी जिनपिंग और रूस के व्लादिमीर पुतिन समेत BRICS नेताओं ने तालियां बजाईं। मोदी ने कहा, “किसी सदस्य ने आपत्ति नहीं जताई, नई दिल्ली घोषणा 2026 सर्वसम्मति से स्वीकार की गई।”

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस

BRICS ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराते हुए जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले की विशेष रूप से निंदा की, जिसमें 25 पर्यटकों की मौत हुई थी और इसके बाद पाकिस्तान के साथ संघर्ष हुआ। घोषणा में आतंकवाद पर “दोहरा मापदंड” न अपनाने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की बात कही गई। किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन संदेश का संकेत पाकिस्तान की ओर माना गया।

साथ ही भारत द्वारा 1996 में संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तावित Comprehensive Convention on International Terrorism को जल्द अपनाने की अपील की गई।

युद्ध रोकने और बातचीत पर जोर

मध्य पूर्व संकट और जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच BRICS ने संघर्ष रोकने के प्रयास तेज करने तथा विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति से करने पर जोर दिया। गाजा को लेकर युद्धविराम बनाए रखने और बिना बाधा मानवीय सहायता पहुंचाने की मांग की गई। साथ ही दो-राष्ट्र समाधान और फिलिस्तीन की पूर्ण UN सदस्यता का समर्थन किया गया।

अमेरिकी टैरिफ पर जताई चिंता

अमेरिका BRICS बैठक में शामिल नहीं था, लेकिन उसके टैरिफ चर्चा में रहे। घोषणा में एकतरफा आर्थिक और द्वितीयक प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा गया कि ये विकास, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानवाधिकारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। समूह ने एकतरफा टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाओं और संरक्षणवादी कदमों पर भी चिंता जताई।

परमाणु खतरे पर बढ़ी चिंता

BRICS ने परमाणु खतरे और संघर्ष के बढ़ते जोखिमों पर भी चिंता जताई। ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमलों और प्रमुख शक्तियों के बीच हथियार नियंत्रण व्यवस्था में गिरावट के बीच यह भाषा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह पिछले BRICS बयानों की तुलना में अधिक सख्त रुख है, जिनमें ऐसे “बढ़ते” जोखिमों का उल्लेख नहीं किया गया था।

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