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BRICS Summit 2026: शिखर सम्मेलन के बड़े फैसले और अहम बातें

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में दो दिवसीय BRICS शिखर सम्मेलन के पहले दिन सदस्य देशों के नेताओं ने सर्वसम्मति से 'न्यू दिल्ली घोषणापत्र' अपनाया। यह सहमति ऐसे समय बनी है जब समूह के सदस्यों के बीच ईरान और यूक्रेन युद्ध को लेकर गंभीर मतभेद हैं। घोषणापत्र में मध्य पूर्व में संयम बरतने की अपील की गई, लेकिन अमेरिका-इजरायल के हमलों या ईरान की ओर से खाड़ी देशों को निशाना बनाए जाने की सीधे तौर पर निंदा नहीं की गई। वैश्विक व्यापार युद्ध पर भी चिंता जताई गई, लेकिन अमेरिका का नाम नहीं लिया गया।

क्या है BRICS?

BRICS की शुरुआत 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के आर्थिक मंच के रूप में हुई थी। 2010 में दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हुआ। इसके बाद मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया भी समूह का हिस्सा बने। 11 सदस्यीय समूह दुनिया की करीब आधी आबादी और लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है।

BRICS विश्व बैंक, IMF और WTO जैसी पश्चिमी प्रभाव वाली संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने और सुधारों की मांग करता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि BRICS किसी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने ग्लोबल साउथ से 'रूल-टेकर' के बजाय 'रूल-शेपर' बनने का आह्वान किया।

ईरान युद्ध पर सावधानी भरी भाषा

ईरान को लेकर घोषणापत्र में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई जो स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं। हालांकि अमेरिका, इजरायल, ईरान या खाड़ी देशों का नाम नहीं लिया गया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने युद्ध को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के खिलाफ बताया और राजनीतिक समाधान तथा स्थायी एवं व्यापक युद्धविराम की मांग की। मई में ईरान युद्ध को लेकर BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक बिना संयुक्त बयान के खत्म हुई थी। ईरान और UAE दोनों BRICS सदस्य हैं, लेकिन संघर्ष में अलग-अलग पक्षों से जुड़े हैं।

भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने इसे भारत की महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता बताया। उनके मुताबिक, ईरान-UAE मतभेदों के बावजूद आम सहमति केवल सामान्य और सावधानीपूर्ण भाषा के जरिए कायम हो सकी। International Crisis Group के प्रवीण डोंथी ने भी कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में उम्मीदें कम थीं और भारत ने सभी सदस्यों के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल कर सहमति बनाने में भूमिका निभाई।

घोषणापत्र में नागरिक ढांचे और IAEA सुरक्षा उपायों के तहत संरक्षित शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर जानबूझकर हमलों को लेकर चिंता जताई गई। इसे ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिका-इजरायल के हमलों की अप्रत्यक्ष आलोचना माना जा सकता है। 2025 के 12-दिवसीय युद्ध में अमेरिका ने नतांज, इस्फहान और फोर्डो स्थित तीन प्रमुख ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला किया था।

यूक्रेन युद्ध पर भी सीधे नाम से बचाव

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर BRICS ने विवादों को बातचीत, परामर्श और कूटनीति से सुलझाने की सामान्य अपील की, लेकिन यूक्रेन का नाम नहीं लिया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया गया।

यह रुख रूस के लिए अहम है, जिस पर 2022 के यूक्रेन आक्रमण के बाद व्यापक पश्चिमी प्रतिबंध हैं। भारत भी मॉस्को के साथ करीबी संबंध बनाए हुए है और रूस से तेल खरीदता रहा है। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसके बाद भारत ने रूसी तेल आयात घटाया है। रविवार को क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मोदी और शी ने यूक्रेन शांति वार्ता में मदद की पेशकश की, जिसका स्वागत राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने किया।

फिलिस्तीन पर BRICS का स्पष्ट रुख

फिलिस्तीन के मुद्दे पर समूह की भाषा अधिक स्पष्ट रही। BRICS ने फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों की भौगोलिक या जनसांख्यिकीय स्थिति बदलने के प्रयासों का विरोध किया। घोषणापत्र में गाजा में इजरायल के युद्ध को समाप्त करने, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच, UNRWA के समर्थन और फिलिस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता देने की बात कही गई। साथ ही 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर संप्रभु फिलिस्तीनी राष्ट्र के साथ दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन दोहराया गया।

अमेरिकी टैरिफ और बहुध्रुवीय विश्व पर जोर

BRICS ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर चिंता जताई, जो वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं। समूह ने बिना UNSC मंजूरी वाले प्रतिबंधों का भी विरोध किया। चीन, रूस और भारत समेत कई BRICS देशों पर अमेरिका ने टैरिफ लगाए हैं। ट्रंप पहले BRICS को 'अमेरिका विरोधी' बता चुके हैं और इसके साथ जुड़ने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ की धमकी दे चुके हैं।

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि औपनिवेशिक सोच रखने वाले देश टैरिफ, प्रतिबंधों और ताकत के इस्तेमाल से उभरती शक्तियों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। BRICS ने इसके साथ वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन, ऊर्जा प्रवाह और समुद्री सुरक्षा की रक्षा के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

समूह ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। पुतिन ने UNSC में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की। शी ने अधिक न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था की बात कही। मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ को नियमों का पालन करने वाले से आगे बढ़कर नियम तय करने वाला बनना होगा और 'विशेषाधिकार की पिरामिड' को साझेदारी के मंच में बदलने का आह्वान किया। साथ ही भारत ने दोहराया कि BRICS का उद्देश्य पश्चिम का विरोध करना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है।

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