दिल्ली/NCR

दिल्ली में ‘प्रदूषण का प्रेशर कुकर’ फटने की कगार पर… इलाकों की हवा रेड जोन में बदली, जाने क्या है नए नियम

Delhi-NCR AQI: दिल्ली-NCR की हवा एक बार फिर जहर घोलने लगी है। राजधानी लगातार 12वें दिन बहुत खराब श्रेणी में दर्ज हुई और प्रदूषण का स्तर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया। मंगलवार सुबह दिल्ली का कुल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 353 पर रहा, जबकि 24 घंटे का औसत 352 रिकॉर्ड किया गया। ये आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि शहर स्मॉग की गिरफ्त में है और हालात सामान्य होने के बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं।

क्या है नियम

प्रदूषण के तेज़ी से बढ़ते खतरे को देखते हुए CAQM ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-3 लागू कर दिया है। खास बात यह है कि इस बार कुछ प्रावधान स्टेज-4 की सख्ती को भी छू रहे हैं। GRAP-3 के एक्टिव होते ही गैर-जरूरी निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्यों पर तुरंत रोक लगा दी गई है। सरकार का मानना है कि इस सख्ती के बिना प्रदूषण की रफ्तार पर लगाम लगाना मुश्किल है।

रेड जोन में शामिल शहर

दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में प्रदूषण का स्तर रेड जोन में पहुंच चुका है, यानी हवा बेहद खराब, स्वास्थ्य के लिए खतरनाक। CPCB के सुबह 6 बजे के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। आनंद विहार 365, अलीपुर 342, अशोक विहार 362, बवाना 382, बुराड़ी 347, मथुरा रोड 320, चांदनी चौक 343, द्वारका सेक्टर-8 में 364 और ITO 360 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गए। जहांगीरपुरी और नेहरू नगर का AQI 367 दर्ज हुआ, जबकि मुंडका 376 और रोहिणी 378 पर पहुंचकर रेड जोन में सबसे खराब श्रेणी में शामिल हो गए। वजीरपुर (375), विवेक विहार (365), ओखला फेज-2 (335) और नरेला (351) जैसे क्षेत्र भी प्रदूषण की चपेट में हैं। केवल लोधी रोड जैसे कुछ क्षेत्र ही ‘मध्यम’ श्रेणी के करीब दिखे, लेकिन अधिकांश इलाकों में हवा स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक बनी हुई है।

वाहनों पर बढ़ी सख्ती

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वाहनों पर भी सख्ती बढ़ा दी गई है। दिल्ली-NCR के प्रमुख जिलों- गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों के चलने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके अलावा इंटर-स्टेट चलने वाली डीजल बसों के दिल्ली में एंट्री पर भी प्रतिबंध लगा है। केवल CNG, इलेक्ट्रिक और BS-VI बसों को ही शहर में आने की अनुमति मिलेगी।

सांस संबंधी मरीजों की बढ़ती भीड़

एक ओर हवा जहरीली हो रही है, दूसरी ओर अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों पर इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसी तरह प्रदूषण बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल, सरकार की सख्ती और लोगों की सावधानी ही दिल्ली की हवा को राहत दे सकती है, वरना प्रदूषण का यह ‘साइलेंट बम’ कभी भी बड़ा खतरा बन सकता है।

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Shagun Chaurasia

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