Thursday, Sep 03

होम = News Featured = जंग कैसी भी हो, कम नहीं पड़ेंगी मिसाइलें! राजनाथ सिंह का बड़ा फैसला

जंग कैसी भी हो, कम नहीं पड़ेंगी मिसाइलें! राजनाथ सिंह का बड़ा फैसला

by | Aug 25, 2026 | News Featured

DRDO missile technology transfer: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO द्वारा विकसित पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय उद्योगों को हस्तांतरित करने को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य देश में ही मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाना और रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी निर्भरता कम करना है।

भारतीय कंपनियों को मिलेगी तकनीक

इस फैसले के बाद DRDO की ओर से विकसित तकनीकों को देश की योग्य निजी कंपनियों और अन्य औद्योगिक साझेदारों तक पहुंचाया जा सकेगा। पहले ऐसी कई तकनीकें मुख्य रूप से सरकारी रक्षा संस्थानों के दायरे में थीं। अब उद्योग जगत को इनके उत्पादन में बड़ी भूमिका मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कंपनियों को उत्पादन शुरू करने से पहले निर्धारित तकनीकी मानकों, प्रमाणपत्रों और जरूरी नियामकीय शर्तों को पूरा करना होगा। इससे मिसाइल निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

MSME को भी मिलेगा फायदा

इस पहल से केवल बड़ी रक्षा कंपनियों को ही नहीं, बल्कि MSME और अन्य तकनीकी साझेदारों को भी अवसर मिलने की संभावना है। मिसाइल निर्माण की सप्लाई चेन में ज्यादा कंपनियों के शामिल होने से घरेलू रक्षा उद्योग का विस्तार हो सकता है। इसके साथ ही कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

कम होगी विदेशी निर्भरता

सरकार का प्रमुख लक्ष्य रक्षा उत्पादन की घरेलू क्षमता को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता घटाना है। देश में ही मिसाइल प्रणालियों का उत्पादन बढ़ने से भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। आपात स्थिति में हथियारों और जरूरी प्रणालियों की आपूर्ति बनाए रखने की क्षमता भी मजबूत हो सकती है।

DRDO की भूमिका में भी बदलाव

इस कदम से DRDO का ध्यान नई रक्षा तकनीकों के विकास के साथ-साथ उन्हें उद्योग तक पहुंचाने पर और बढ़ेगा। वहीं, निजी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है।

कुल मिलाकर, यह फैसला भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और घरेलू रक्षा उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अगर उद्योग निर्धारित मानकों के अनुसार उत्पादन क्षमता विकसित करते हैं, तो आने वाले समय में भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ रक्षा उत्पादों के निर्यात की क्षमता भी बढ़ा सकता है।

ये भी पढ़ें: https://newsindia24x7.tv/us-visa-action-2-lakh-foreigners/