E20 Petrol Experts: भारत में E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस और सोशल मीडिया पर फैल रहे दावों के बीच ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के एक पैनल ने शनिवार को कहा कि व्यापक परीक्षणों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि E20 ईंधन वाहनों के लिए नुकसानदायक है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि फॉर्मूला-1 रेसिंग कारों में भी एथेनॉल आधारित ईंधन का इस्तेमाल होता है और भारत में E20 को वर्षों के वैज्ञानिक परीक्षण, तकनीकी तैयारी और नियामकीय मंजूरी के बाद लागू किया गया है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व Engineers India Limited (EIL) प्रमुख वर्तिका शुक्ला, बजाज ऑटो के मनप्रीत सिंह, TVS के प्रशाद कृष्णन, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के विक्रम गुलाटी, मारुति सुजुकी के राहुल भारती, हुंडई इंडिया के पुनीत आनंद और हीरो मोटो के आशुतोष वर्मा शामिल थे।
वर्तिका शुक्ला ने कहा कि भारत ने दिसंबर 2025 में E20 मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया और इससे पहले वाहन कंपनियों ने व्यापक परीक्षण किए। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन कम करना है। कनाडा और पैराग्वे जैसे कई देश पहले से E20 का उपयोग कर रहे हैं और यह भारत स्टेज-VI (BS-VI) मानकों के अनुरूप है।
टोयोटा के विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटो उद्योग कड़े नियामकीय ढांचे के तहत काम करता है और वाहनों को मंजूरी मिलने से पहले कई स्तरों पर परीक्षण किए जाते हैं। उन्होंने एथेनॉल को "बेहतरीन ईंधन" बताते हुए कहा कि शुरुआती दौर की कई कारें एथेनॉल पर चलती थीं और आज भी फॉर्मूला-1 कारों में इसका इस्तेमाल होता है। उनके अनुसार, हालिया पश्चिम एशिया संकट ने ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल पर निर्भरता की चुनौतियों को उजागर किया है।
मारुति सुजुकी के राहुल भारती ने माना कि 2023 से पहले बने वाहनों को लेकर लोगों की चिंता स्वाभाविक है, लेकिन अब तक E20 में ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे गंभीर नुकसान की आशंका हो।
पूर्व IOCL चेयरमैन बी. अशोक ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है, किसानों की आय बढ़ी है और कार्बन उत्सर्जन घटा है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों में E20 से इंजन खराब होने या माइलेज पर बड़ा असर पड़ने का कोई प्रमाण नहीं मिला और कई दावे केवल भ्रांतियां हैं।
इस बीच, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारियों का 10 बिंदुओं में जवाब दिया। मंत्रालय ने एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होने के दावे को गलत बताते हुए कहा कि वास्तव में प्रति लीटर एथेनॉल के लिए केवल 3-5 लीटर संसाधित पानी उपयोग होता है। साथ ही, केवल खाद्य सुरक्षा की जरूरत पूरी होने के बाद बचा हुआ चावल ही एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जाता है। कई डिस्टिलरी अब Zero Liquid Discharge तकनीक से पानी का पुनर्चक्रण भी कर रही हैं। मंत्रालय ने इंजन नुकसान, बीमा अमान्य होने और पर्यावरणीय नुकसान के दावों को भी खारिज किया।
सरकार का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम 2003 में कच्चे तेल के आयात को घटाने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से शुरू हुआ था। हालांकि, 2023 से लागू E20 अनिवार्यता के बाद विशेषकर पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों ने माइलेज कम होने, रखरखाव खर्च बढ़ने और वाहन के अधिक घिसने जैसी शिकायतें की हैं।
वहीं, भूटान ने भारत से E20 अपनाने का प्रस्ताव ठुकराते हुए सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखने का अनुरोध किया है। The Bhutanese के अनुसार, इसकी वजह E20 नहीं बल्कि वहां के पुराने भूमिगत ईंधन टैंक हैं, जिनमें पानी रिसने का खतरा रहता है। इसी आधार पर भूटान ने फिलहाल पारंपरिक पेट्रोल को जारी रखने का फैसला लिया है।
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