Monday, Sep 14

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छात्रों की NSA हिरासत पर इलाहाबाद HC की फटकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं नोएडा DM मेधा रूपम

Noida DM Medha Roopam: गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और एक्टिविस्ट अकर्ति चौधरी की NSA के तहत हिरासत रद्द करते हुए 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने यह राशि DM की सैलरी और मामले में जिम्मेदार अन्य अधिकारियों से लेकर SHO तक वसूलने को कहा था।

हाईकोर्ट ने हिरासत को बताया था गैरकानूनी

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने 15 पेज के आदेश में कहा था कि चौधरी की लगातार हिरासत उनके अनुच्छेद 21 के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट के मुताबिक, हिरासत आदेश और उसके आधार में पर्याप्त सामग्री नहीं थी और इन्हें बिना उचित विवेक के इस्तेमाल के पारित किया गया। 25 वर्षीय इतिहास स्नातक चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। 13 मई को पुलिस ने उनके और एक्टिविस्ट-पत्रकार सत्यम वर्मा के खिलाफ NSA, 1980 लगाया। दोनों अधिक मजदूरी की मांग को लेकर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन से जुड़े गिरफ्तार किए गए कई कार्यकर्ताओं में शामिल थे।

अधिकारियों को संविधान के प्रति निष्ठा की याद

हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की निष्ठा संविधान के प्रति होती है, राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति नहीं। कोर्ट ने चेताया कि यदि नौकरशाह और पुलिसकर्मी अपनी शपथ की अनदेखी करते हैं तो जनता उन्हें ब्रिटिश शासन के “दमनकारी अवशेष” के रूप में देख सकती है। बेंच ने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति उत्तर प्रदेश को “Orwellian Dystopia” में बदल सकती है।

कोर्ट ने DM मेधा रूपम की भी कड़ी आलोचना की और कहा कि पुलिस रिपोर्ट में ठोस सामग्री के बजाय केवल आरोप थे, इसलिए उन्हें रिकॉर्ड की गहन जांच करनी चाहिए थी। कोर्ट ने कहा कि चौधरी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और हिंसा भड़काने का प्रमाण भी नहीं मिला। बेंच ने माना कि DM का आचरण निंदनीय था और परिस्थितियां संकेत देती हैं कि चौधरी को उदाहरण बनाने तथा मजदूरों के समर्थन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने वालों को रोकने की मंशा थी।

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