व्यापार

पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे, सरकार का बड़ा राहत कदम तैयार

Petrol Diesel Price Stability: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकार ने नया रणनीतिक कदम तैयार किया है। पब्लिक सेक्टर की पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां (OMC) अब रिफाइनरीज को इंपोर्टेड कच्चे तेल के मुकाबले कम रेट पर फ्यूल देने पर विचार कर रही हैं। इस कदम का मकसद रिटेल कीमतों को बढ़ाए बिना उपभोक्ताओं को राहत देना और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ कंपनियों के शेयर में बांटना है।

ग्लोबल तेल संकट और घरेलू असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल-अमेरिका टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं। बावजूद इसके भारत में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसका असर यह हुआ कि इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी कंपनियों को इस अंतर का बोझ खुद उठाना पड़ रहा है।

क्या है सरकार की योजना

सूत्रों के अनुसार, OMC अब रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस (RTP) पर रोक या छूट देने पर विचार कर रही हैं। RTP वह आंतरिक मूल्य है, जिस पर रिफाइनरीज अपने उत्पाद मार्केटिंग कंपनियों को बेचती हैं। इस रणनीति के लागू होने पर रिफाइनरीज को पेट्रोल और डीजल की इंपोर्टेड लागत का पूरा भार RTP के जरिए आगे नहीं बढ़ाना होगा। इसके बजाय, उनका एक हिस्सा खुद वहन करना पड़ेगा।

घाटे की भरपाई कैसे होगी

आईओसी, बीपीसीएल और HPCL जैसी इंटीग्रेटिड कंपनियां अपने रिफाइनिंग और मार्केटिंग ऑपरेशन के बीच घाटे की भरपाई कर सकती हैं। लेकिन MRPL, CPCL और HMEL जैसी सिंगल रिफाइनरीज पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ये कंपनियां अपने अधिकांश उत्पादन को OMC को बेचती हैं, जिससे उनका मार्जिन घट सकता है।

प्राइवेट रिफाइनरीज भी प्रभावित

यदि RTP पर रोक या छूट सभी रिफाइनरीज पर लागू होती है, तो नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी प्राइवेट रिफाइनरीज भी प्रभावित होंगी। ये कंपनियां अपने उत्पादन का बड़ा हिस्सा OMC को बेचती हैं, जो देश के लगभग 1 लाख पेट्रोल पंपों में 90% की मालिक और ऑपरेटर हैं।

जनता को सीधी राहत

इस कदम का सबसे बड़ा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतें स्थिर रहने से घरों और व्यवसायों पर वित्तीय दबाव कम होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति सरकार की आर्थिक समझदारी और उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इस योजना के लागू होने के बाद तेल कंपनियों को घाटे की भरपाई का संतुलन बनाना होगा, जबकि जनता को राहत मिलती रहेगी। ऐसे में आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी रह सकती हैं, जबकि ग्लोबल बाजार में तेल के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कंपनियों पर ही पड़ेगा।

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Shagun Chaurasia

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