Holi Bhang Tradition
Holi Bhang Tradition: होली का नाम आते ही रंग, गुलाल, ढोल और मस्ती के साथ एक चीज़ और याद आती है भांग। कई जगहों पर होली के दिन भांग की ठंडाई, लस्सी या पकौड़े तक बनाए जाते हैं। लेकिन सवाल ये है कि होली पर भांग पीने की परंपरा शुरू कैसे हुई? और क्या इसका कोई धार्मिक संबंध भी है या यह सिर्फ मस्ती का हिस्सा बन गया है।
भांग एक पारंपरिक पेय या खाद्य सामग्री है, जिसे भांग के पत्तों से तैयार किया जाता है। भारत में इसे कई जगहों पर खास मौकों पर बनाया जाता है। भांग को आम नशे की चीज़ों से अलग माना जाता है क्योंकि इसका इस्तेमाल पुराने समय से धार्मिक और आयुर्वेदिक परंपराओं में भी मिलता है।
होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह खुशी, मेल-जोल और तनाव से मुक्त होने का पर्व भी माना जाता है। पुराने समय में जब गांवों में होली मनाई जाती थी, तब लोग फसल कटने की खुशी मनाते थे, पूरे साल की थकान और तनाव भूलते थे ,नाच-गाने और लोकगीतों के साथ त्योहार मनाते थे। इसी माहौल में भांग को एक ऐसे पेय के रूप में देखा गया जो शरीर को ठंडक देता है और उत्सव की ऊर्जा बढ़ाता है।
होली पर भांग का सबसे बड़ा धार्मिक संबंध भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है। शिवजी को कई जगहों पर “भोलेनाथ” कहा जाता है, और लोकमान्यता है कि उन्हें भांग प्रिय है। मान्यताओं के अनुसार शिवजी तपस्या और वैराग्य के प्रतीक हैं, भांग को कुछ जगहों पर “शिव की प्रिय वस्तु” माना गया है, कई मंदिरों और धार्मिक स्थानों पर भांग का उपयोग प्रसाद की तरह भी होता है। इसी वजह से महाशिवरात्रि और होली जैसे पर्वों पर भांग का सेवन कई क्षेत्रों में परंपरा बन गया।
भांग का होली से सबसे ज्यादा जुड़ाव इन जगहों पर देखा जाता है। उत्तर प्रदेश (खासतौर पर मथुरा-वृंदावन क्षेत्र), राजस्थान ,मध्य प्रदेश ,बिहार ,दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिस्से ,इन क्षेत्रों में होली के दिन भांग वाली ठंडाई काफी आम है।
होली का मूल उद्देश्य है ,गिले-शिकवे भूलना ,रिश्तों में मिठास बढ़ाना ,तनाव को दूर करना। भांग की परंपरा भी उसी 'मस्ती और उत्सव' से जुड़ी है, लेकिन सीमित और जिम्मेदारी के साथ।
होली पर भांग का ट्रेंड कोई नई चीज़ नहीं है। यह परंपरा पुराने समय से चली आ रही है और इसका धार्मिक संबंध मुख्य रूप से भगवान शिव से जोड़ा जाता है।
हालांकि, यह भी सच है कि आज के समय में इसका चलन कई जगहों पर ट्रेंड और फैशन में बदल चुका है। इसलिए होली का असली आनंद रंगों, रिश्तों और खुशियों में है ,किसी भी चीज़ की अति त्योहार की खूबसूरती को बिगाड़ सकती है।
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