the private secretary was removed from the post for giving VIP treatment
UP Private secretary removed : योगी सरकार (Yogi government) में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के बेटे अभिषेक सिंह को बिना किसी आधिकारिक पद के वीआईपी प्रोटोकॉल दिलाने का मामला सामने आने के बाद बड़ा एक्शन लिया गया है। मंत्री के निजी सचिव आनंद शर्मा को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई तब हुई जब मामला मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। मुख्यमंत्री कार्यालय तक रिपोर्ट पहुंची और इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने भी नाराजगी जताई।
मामला तब उजागर हुआ जब जालौन के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को मंत्री के निजी सचिव की ओर से एक चिट्ठी लिखी गई। इस पत्र में निर्देश दिया गया था कि मंत्री के बेटे अभिषेक सिंह को जिले में भ्रमण के दौरान वीआईपी प्रोटोकॉल उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, अभिषेक सिंह किसी भी आधिकारिक पद पर नहीं हैं और उन्हें इस तरह की सुविधा देने का अधिकार नहीं है। प्रोटोकॉल केवल उन्हीं लोगों को दिया जाता है जो संवैधानिक या महत्वपूर्ण पद पर हों। मामला सार्वजनिक होने पर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए निजी सचिव को उनके पद से हटा दिया।
प्रोटोकॉल व्यवस्था दरअसल एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कुछ विशेष पदों पर बैठे लोगों को औपचारिक सम्मान और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। इसमें बैठने की व्यवस्था से लेकर सुरक्षा इंतजाम और स्वागत की प्रक्रिया तक सब कुछ शामिल होता है। इसका उद्देश्य सरकारी और औपचारिक आयोजनों को गरिमामय ढंग से संपन्न करना होता है। भारत में प्रोटोकॉल राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, न्यायपालिका के वरिष्ठ जजों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों को दिया जाता है। इसके अलावा विदेशी राजदूतों, उच्चायुक्तों और भारत आने वाले राष्ट्राध्यक्षों को भी विशेष प्रोटोकॉल का प्रावधान है। कुछ मामलों में सुरक्षा कारणों से सामाजिक कार्यकर्ताओं या प्रमुख हस्तियों को भी प्रोटोकॉल की सुविधाएं मिल सकती हैं।
अभिषेक सिंह इनमें से किसी श्रेणी में नहीं आते हैं, इसलिए उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाने का प्रयास नियमों का उल्लंघन माना गया। यह मामला उजागर होने के बाद विपक्ष ने भी सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से तुरंत कार्रवाई किए जाने के बाद सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि नियमों से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल अभिषेक सिंह से संबंधित यह विवाद चर्चा में है और माना जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण से सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सख्ती का संकेत दिया है।
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