Middle East missile strike: अमेरिका और इजराइल के गठबंधन और ईरानी शासन के बीच तनाव और बढ़ गया है, जब तेहरान ने खाड़ी देशों और इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की नई श्रृंखला शुरू की। इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर प्रभाव डाला है। कई मीडिया रिपोर्ट्स ने सऊदी अरब की रास तनूरा रिफाइनिंग सुविधा पर ड्रोन हमलों की सूचना दी। यह सुविधा दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्रों में से एक है और वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में अहम भूमिका निभाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, रास तनूरा केंद्र में आग लगी, लेकिन उसे बाद में काबू में कर लिया गया। ईरानी मीडिया का दावा है कि इस बंदरगाह का इस्तेमाल अमेरिका द्वारा ईरान विरोधी अभियानों के लिए रसद उपकरणों के परिवहन में किया जा रहा था।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने अपने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस’ के तहत ताजा हमलों की जानकारी दी। बयान में कहा गया कि दसवीं लहर ने खैबर मिसाइलों के माध्यम से कब्जे वाले क्षेत्रों पर भारी गोलाबारी की। ईरानी मीडिया ने टेलीग्राम पर एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें कथित रूप से एक अमेरिकी एफ-15 पायलट दिखाई दिया, जिसका विमान सोमवार को कुवैत में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत में एक फाइजट जेट को ईरान ने मार गिराया।
इसके अलावा, ईरानी मीडिया ने बड़े ड्रोन बेड़े और पूरे क्षेत्र में अमेरिकी-इजरायली ठिकानों पर हमलों की दृश्य सामग्री प्रसारित की। इन हमलों की तीव्रता देखकर खाड़ी देशों के अधिकारी स्तब्ध रह गए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि खामेनेई के सत्ता से हटने के बाद हमें यकीन था कि ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा, लेकिन उन्होंने सिर्फ सैन्य ठिकानों को नहीं, बल्कि आबादी वाले क्षेत्रों को भी निशाना बनाया; यह पूरी तरह से असामान्य है। दूसरे अधिकारी ने इसे 'सोच से परे भयावह' बताया।
यह नया टकराव 28 फरवरी से शुरू हुए व्यापक संघर्ष के बाद सामने आया। सऊदी अरब ने ईरान के हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की। इसके अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका और खाड़ी देशों ने भी संयुक्त बयान जारी कर ईरानी कार्रवाई की आलोचना की। इस घोषणा का समर्थन बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात ने भी किया।
रॉयटर्स के अनुसार, ड्रोन हमलों के कारण लगी आग के बाद रास तनूरा रिफाइनिंग सुविधा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। सेमाफोर के पत्रकार ने अज्ञात सूत्रों के हवाले बताया कि आग सीमित क्षेत्र में थी और उसे काबू में कर लिया गया। इस हमले से तेल आपूर्ति पर अस्थायी प्रभाव पड़ा, लेकिन बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं हुआ।
ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच यह टकराव खाड़ी देशों में सुरक्षा चिंता को और बढ़ा रहा है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा हो सकती है। साथ ही, क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने दिखा दिया है कि ईरानी जवाबी कार्रवाई अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है, जिससे खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सतर्कता बढ़ गई है।
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