Keshav Maurya Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से महिलाओं को साधने के लिए किए गए नए ऐलान के बाद भाजपा ने पलटवार किया है। यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जनता इन नेताओं को नकार चुकी है और अब 2027 में उत्तर प्रदेश में सपा की बारी है।
दरअसल, अखिलेश यादव और डिंपल यादव ने बुधवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान सपा की ओर से महिलाओं के लिए 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' के तहत सालाना 40 हजार रुपये देने और छात्राओं को लैपटॉप उपलब्ध कराने का ऐलान किया गया। सपा के इस ऐलान को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इसी मुद्दे पर केशव मौर्य ने सपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला।
केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए बिहार के नेता तेजस्वी यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम लिया। उनका कहना था कि इन नेताओं के चेहरे अलग हैं, लेकिन उनकी राजनीति और घोषणाओं का चरित्र एक जैसा है। केशव मौर्य ने दावा किया कि बिहार में राष्ट्रीय जनता दल, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और दिल्ली में आम आदमी पार्टी को जनता नकार चुकी है। उन्होंने इसी क्रम में कहा कि 2027 में उत्तर प्रदेश में अगला नंबर समाजवादी पार्टी का है।
उपमुख्यमंत्री ने अपने बयान में अखिलेश यादव के लिए तंज के तौर पर 'सपा बहादुर' शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की ओर से किए जा रहे लोकलुभावन वादों पर उत्तर प्रदेश की जनता भरोसा नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सपा के मुंह से महिला सुरक्षा और महिला सम्मान की बात करना केवल छलावा है। केशव मौर्य ने 2012 से 2017 के बीच रही सपा सरकार के कार्यकाल को लेकर अपराध, गुंडागर्दी, माफियाराज और दंगों जैसे मुद्दों पर भी हमला बोला।
केशव मौर्य ने सपा के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वाले राजनीतिक समीकरण पर भी निशाना साधा। उन्होंने PDA को 'परिवार डेवलपमेंट एजेंसी' बताते हुए आरोप लगाया कि सपा की राजनीति परिवार तक सीमित है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की महिलाएं सपा की राजनीति और उसके वादों को समझती हैं और आगामी चुनाव में उसके झांसे में नहीं आएंगी।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। चुनाव से काफी पहले ही राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। सपा जहां सरकार को घेरने और अलग-अलग वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा नेता सपा के वादों और पिछली सरकार के कार्यकाल को मुद्दा बनाकर पलटवार कर रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव की ओर से किए गए महिला-केंद्रित ऐलान पर केशव मौर्य की प्रतिक्रिया ने यूपी की सियासत में एक और नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
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