the inspiring story of Medha Rupam
Noida DM Medha Rupam : यूपी की राजनीतिक गलियारों में एक नाम तेजी से चर्चा में आ रहा है – मेधा रूपम। जी हां, वही मेधा रूपम जो अब नोएडा की नई जिलाधिकारी (District Magistrate of Noida) बनी हैं। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ एक IAS अधिकारी बनने तक सीमित नहीं है। यह है एक ऐसी महिला की गाथा जिसने निशानेबाजी के मैदान से शुरुआत करके प्रशासन के शिखर तक का सफर तय किया है। अब वह नोएडा की डीएम के तोर पर कार्यभार संभालेंगी। इससे पहले जानते है की कौन है मेधा रूपम।
21 अक्टूबर को आगरा में जन्मी मेधा के जीवन में किस्मत का खेल कुछ यूं रहा कि उनके पिता ज्ञानेश कुमार गुप्ता आज देश के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। घर में लोकतंत्र की चर्चा, ईमानदारी की बातें और देश सेवा के किस्से सुनते-सुनते मेधा के मन में भी कुछ बड़ा करने का जुनून पैदा हुआ। पिता की केरल में तैनाती के कारण प्रारंभिक शिक्षा वहीं हुई, लेकिन सपने राष्ट्रीय स्तर के थे।
2008 में 12वीं कक्षा के दौरान मेधा ने शूटिंग में हाथ आजमाया। यह सिर्फ शौक नहीं था, बल्कि जुनून था। केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे निशाना लगाना जानती हैं – सिर्फ गोली का नहीं, बल्कि जिंदगी में भी। राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के बाद एक दिन उन्होंने फैसला किया कि अब वक्त है असली निशाना लगाने का – देश सेवा का।
शूटिंग के मैदान से निकलकर मेधा ने UPSC की तैयारी शुरू की। 2014 बैच में IAS बनकर उन्होंने साबित कर दिया कि प्रतिभा में कोई कमी नहीं थी। पहली तैनाती बरेली में सहायक मजिस्ट्रेट के रूप में हुई। मेरठ और उन्नाव में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के दौरान भी उन्होंने अपने पुराने हुनर को जिंदा रखा और एक शूटिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर दिखाया कि प्रतिभा कभी मरती नहीं।
मेधा रूपम की प्रशासनिक दक्षता जल्द ही सबकी नजरों में आ गई। लखनऊ में UPSAM का संयुक्त निदेशक, महिला कल्याण विभाग की विशेष सचिव, बाराबंकी की मुख्य विकास अधिकारी और फिर हापुड़ की जिलाधिकारी – हर पद पर उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। सीएम योगी आदित्यनाथ के ‘भरोसेमंद अधिकारियों’ की लिस्ट में उनका नाम शामिल होना कोई इत्तेफाक नहीं था।
फरवरी 2023 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की अतिरिक्त CEO बनकर मेधा का नोएडा से रिश्ता गहरा हुआ। जेवर एयरपोर्ट और इंटरनेशनल फिल्म सिटी जैसे योगी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट्स को देखने का मौका मिला। अब जब वे कासगंज से वापस नोएडा लौटी हैं, तो इन परियोजनाओं में नई गति मिलने की उम्मीदें तेज हो गई हैं।
नोएडा जैसे इंडस्ट्रियल हब की कमान संभालना कोई आसान काम नहीं। लेकिन मेधा रूपम के पास जो चीज है, वह है – अनुभव, दक्षता और सबसे बढ़कर वह जुनून जो उन्होंने शूटिंग रेंज से लेकर आज तक बनाए रखा है। निशानेबाजी में जैसे हर गोली का अपना लक्ष्य होता है, वैसे ही प्रशासन में भी उनकी हर योजना का एक साफ मकसद है। कहते हैं कि जो लोग एक बार निशाना साधना सीख जाते हैं, वे जिंदगी में कभी चूकते नहीं। मेधा रूपम की कहानी इस बात का जीता-जागता सबूत है। अब देखना यह है कि नोएडा के विकास का निशाना वे कितनी सटीकता से साधती हैं।
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