महाराष्ट्र

BMC मेयर पर लॉटरी का फैसला, मुंबई को मिलेगी महिला मेयर, सियासी गणित बदला!

BMC Mayor 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में गुरुवार का दिन बेहद अहम साबित हुआ। मुंबई की सबसे ताकतवर नगर निगम BMC से लेकर पुणे, नागपुर और नाशिक महानगरपालिकाओं तक, मेयर पद को लेकर चली लंबी खींचतान का आखिरकार फैसला हो गया। आरक्षण की लॉटरी में मुंबई BMC समेत इन बड़े शहरों की मेयर कुर्सी महिलाओं के खाते में चली गई। यानी आने वाले दिनों में देश की सबसे अमीर महानगरपालिका की कमान एक महिला मेयर के हाथों में होगी।

लॉटरी से कैसे तय हुआ मेयर का वर्ग?

नगर निगम चुनाव के बाद मेयर पद का आरक्षण चक्रानुक्रम (Rotation) प्रक्रिया से तय होता है। हर बार यह लॉटरी तय करती है कि पद महिला, SC, ST, OBC या सामान्य वर्ग को मिलेगा। इस बार मुंबई BMC के लिए निकली लॉटरी ने सभी अटकलों को खत्म करते हुए मेयर पद को सामान्य श्रेणी (महिला) के लिए आरक्षित कर दिया।

क्यों था इतना बड़ा सस्पेंस?

BJP और शिवसेना (शिंदे गुट) ने मिलकर 118 सीटें जीती हैं, लेकिन उनके खेमे में कोई SC वर्ग का पार्षद नहीं था। ऐसे में अगर मेयर पद SC के लिए आरक्षित होता, तो उद्धव ठाकरे गुट को सीधा फायदा मिल सकता था। यही वजह थी कि लॉटरी पर सभी की नजरें टिकी थीं।

सिर्फ मुंबई नहीं, पुणे-नाशिक में भी महिला मेयर

लॉटरी में पुणे, नागपुर और नाशिक नगर निगमों के मेयर पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं। यानी महाराष्ट्र के सबसे बड़े और अहम शहरी निकायों की कमान अब महिला नेतृत्व के हाथों में होगी। यह फैसला सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदलने वाला माना जा रहा है।

‘ओपन कैटेगरी’ का मतलब क्या है?

सामान्य श्रेणी (महिला) होने से जातिगत बाध्यता खत्म हो गई है। अब पार्टियां किसी खास वर्ग की महिला उम्मीदवार खोजने को मजबूर नहीं होंगी। वे अपनी सबसे मजबूत, लोकप्रिय और चुनावी तौर पर फायदेमंद महिला पार्षद को मैदान में उतार सकती हैं। इससे मुकाबला पूरी तरह फेस वैल्यू और पॉलिटिकल स्ट्रेंथ पर टिक गया है।

30 साल से शिवसेना का किला, अब नई रणनीति

पिछले तीन दशकों से BMC शिवसेना का गढ़ रही है, लेकिन अब ओपन कैटेगरी होने से बीजेपी और शिंदे गुट किसी बड़े चेहरे पर दांव खेल सकते हैं। माना जा रहा है कि यह लड़ाई अब सिर्फ नंबरों की नहीं, बल्कि रणनीति और फ्लोर मैनेजमेंट की होगी।

अब आगे क्या होगा?

निर्धारित तारीख पर मेयर पद के उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे। जनता नहीं, बल्कि चुने हुए पार्षद मेयर का चुनाव करेंगे। सदन की विशेष बैठक में वोटिंग होगी, जहां पार्टी व्हिप लागू रहेगा। किसी भी पार्षद के पार्टी लाइन से हटने पर उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है।

लॉटरी ने महिला मेयर का रास्ता तो साफ कर दिया है, लेकिन असली मुकाबला अब शुरू होगा। कौन बनेगी मुंबई, पुणे और नागपुर की पहली नागरिक यह फैसला अब राजनीतिक रणनीति, बहुमत और फ्लोर मैनेजमेंट तय करेगा।

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Shagun Chaurasia

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