Mahant Rajudas Mathura Kashi: अयोध्या हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास ने काशी और मथुरा में मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के बाद अब काशी और मथुरा को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। महंत ने न्यायिक प्रक्रिया के साथ संवैधानिक तरीके से आंदोलन करने और जरूरत पड़ने पर कारसेवा करने की बात कही है।
कोर्ट के साथ सड़क पर संघर्ष की बात
महंत राजूदास ने कहा कि संबंधित मामले अदालत में अपनी जगह चलते रहेंगे, लेकिन अपनी मांगों को लेकर उनका संघर्ष भी जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही कारसेवा शुरू करने की तैयारी की जा रही है और मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुद्दे को लेकर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने अपने बयान में कहा कि इस संघर्ष के दौरान उन्हें विरोध और मुश्किलों का सामना करना पड़े तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे।
काशी और मथुरा में मंदिर निर्माण की उम्मीद
महंत राजूदास ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वहां मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ, उसी तरह काशी और मथुरा में भी मंदिर निर्माण की उम्मीद है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि काशी और मथुरा में भी मंदिर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
बाबर और औरंगजेब के नाम पर ढांचे को लेकर बयान
महंत राजूदास ने अपने बयान में मुगल शासकों बाबर और औरंगजेब का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत राम और कृष्ण की भूमि है और इन आक्रमणकारियों के नाम से जुड़े किसी ढांचे को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने विवादित ढांचे को हटाने को लेकर भी आक्रामक बयान दिया और कहा कि इसे लेकर उन्हें कोई रोक नहीं सकता। हालांकि, ऐसे मामलों में अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया और कानून के तहत ही होगा।
योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बनाने की बात
महंत राजूदास ने योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बनाने के लिए प्रयास करने की बात भी कही। उनके इस बयान से काशी और मथुरा से जुड़े धार्मिक मुद्दों के साथ राजनीतिक चर्चा भी तेज होने की संभावना है।
बयान से फिर चर्चा में मथुरा-काशी मुद्दा
महंत राजूदास के कारसेवा और मथुरा-काशी में मंदिर निर्माण से जुड़े बयान के बाद ये मुद्दे एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के साथ आंदोलन जारी रखने की बात कही है। वहीं, किसी भी विवादित धार्मिक स्थल को लेकर आगे की कार्रवाई कानून और अदालत के आदेशों के दायरे में ही हो सकती है।
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