Maharashtra Government Canteen: महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी दफ्तरों और कैंटीनों में पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की है। सरकार ने सरकारी कैंटीनों, बैठकों और आधिकारिक कार्यक्रमों में जंक और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को कम करने तथा मिलेट्स और अंकुरित अनाज जैसे पौष्टिक विकल्पों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर खान-पान के लिए प्रोत्साहित करना और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करना है।
किन जगहों पर लागू होगा आदेश
यह व्यवस्था राज्य के सरकारी दफ्तरों, निदेशालयों, आयुक्त कार्यालयों, जिला कलेक्ट्रेट, जिला परिषद, नगर निगम और नगरपालिकाओं के अलावा सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों, सहायता प्राप्त स्वायत्त संस्थाओं और सरकारी कैंटीनों पर लागू होगी। सरकारी विभागों को अपने कैटरिंग अनुबंध में हेल्दी मेन्यू से जुड़ी शर्तें शामिल करनी होंगी।
मेन्यू में शामिल होंगे ये हेल्दी विकल्प
सरकारी बैठकों और जलपान के दौरान मौसमी फल, भुने या उबले चने, मूंगफली, अंकुरित अनाज, वेजिटेबल पोहा, इडली-सांभर, उपमा और बाजरे की खिचड़ी जैसे विकल्प रखने की सलाह दी गई है। मेवे, बीज और उबले अंडे भी मेन्यू का हिस्सा हो सकते हैं। कैंटीन में ज्वार, बाजरा और रागी की भाखरी, मल्टीग्रेन चपाती, ब्राउन राइस, दाल, मौसमी सब्जियां, कम तेल वाली खिचड़ी और वेजिटेबल पुलाव जैसे व्यंजनों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा चीनी वाले पेय से दूरी
निर्देशों में अधिक चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा वाले खाद्य पदार्थों की खपत कम करने पर जोर दिया गया है। कार्बोनेटेड और ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थों के बजाय दही, छाछ, नारियल पानी, सोलकढ़ी, बिना चीनी का दूध और ग्रीन या हर्बल चाय जैसे विकल्प सुझाए गए हैं।
खाने की पोषण संबंधी जानकारी भी जरूरी
सरकार ने कैंटीन और कैटरिंग में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की पोषण संबंधी जानकारी देने पर भी जोर दिया है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बेहतर खान-पान की आदतों को बढ़ावा देने से मोटापा, मधुमेह, फैटी लिवर, हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
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