हफ्ते के आखिरी दिन बाजार धड़ाम
Stock Market Crash: वैश्विक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भी बाजार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर बाजार पर देखने को मिल रहा है।
सुबह बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव साफ नजर आया। कारोबार के शुरुआती मिनटों में ही BSE सेंसेक्स करीब 600 अंकों से ज्यादा गिरकर 75 हजार के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी-50 भी लगभग 180 अंकों की गिरावट के साथ 23,450 के करीब कारोबार करता दिखा। इससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया और कई सेक्टरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
गुरुवार को भी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स 829 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 76,034 के स्तर पर बंद हुआ था। इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा और केवल एक दिन में ही लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की पूंजी बाजार से साफ हो गई। विदेशी निवेशकों ने भी बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी है। गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने करीब 7,049 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन गया।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजारों पर भी पड़ रहा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसी कारण पिछले कुछ दिनों में सेंसेक्स करीब 5,200 अंकों से अधिक गिर चुका है।
इस गिरावट के कारण भारतीय कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में भी भारी कमी आई है। जहां पहले यह आंकड़ा करीब 463 लाख करोड़ रुपये के आसपास था, वहीं अब यह घटकर लगभग 440 लाख करोड़ रुपये रह गया है। यानी सिर्फ कुछ दिनों में निवेशकों की संपत्ति में करीब 23.44 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आ चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। मध्य पूर्व में तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इस समय ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है और हाल ही में यह 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर चुका है। युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है, जिससे तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है।
भारतीय बाजारों की गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं है। एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी का रुख देखा जा रहा है।
• जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 1.1% गिरा
• दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 1.3% नीचे रहा
• ताइवान का बाजार भी करीब 0.7% कमजोर रहा
• हांगकांग के बाजारों में भी दबाव बना हुआ है
इन वैश्विक संकेतों ने भारतीय बाजारों में निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए यह समय सावधानी बरतने का है, क्योंकि वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार की दिशा लगातार बदल सकती है।
स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर अब भारतीय बाजार पर भी गहराई से दिखाई दे रहा है और निवेशकों की नजर आने वाले दिनों में वैश्विक हालात पर टिकी हुई है।
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