व्यापार

बाजार में भूचाल! सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम, लाखों करोड़ स्वाहा, ट्रंप के बयान से मचा हाहाकार

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन ऐसी गिरावट देखी, जिसने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दीं। गुरुवार की छुट्टी के बाद जैसे ही शुक्रवार सुबह बाजार खुला, हर तरफ लाल निशान छा गए। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई और कुछ ही मिनटों में निवेशकों के करीब 6 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए।

शुरुआत से ही दबाव में बाजार

ओपनिंग के साथ ही सेंसेक्स करीब 800 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 1% की गिरावट देखने को मिली। हालात यहीं नहीं थमे सुबह 10 बजे तक गिरावट और गहरी हो गई।

सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूटकर 74,347 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया
निफ्टी 50 भी करीब 300 अंक गिरकर 23,026 के निचले स्तर पर आ गया

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 1% से ज्यादा की गिरावट ने बाजार की कमजोरी को और साफ कर दिया।

निवेशकों को बड़ा झटका

बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 431 लाख करोड़ रुपये से घटकर 425 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी कुछ ही समय में निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आ गई।

आखिर क्यों टूटा बाजार?

  1. वैश्विक संकेतों से बढ़ी चिंता

दुनिया भर के बाजार पहले से ही दबाव में हैं।

अमेरिका के S&P 500 और Nasdaq करीब 2% तक गिर चुके हैं
एशिया के Nikkei 225 और Kospi में भी भारी गिरावट आई

इस वैश्विक कमजोरी का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ा।

  1. ट्रंप के बयान ने बढ़ाया कन्फ्यूजन

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान ने बाजार में और अनिश्चितता बढ़ा दी।
उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका 6 अप्रैल तक ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले टाल सकता है।

लेकिन दूसरी ओर खबरें ये भी हैं कि इजराइल युद्ध खत्म होने से पहले ईरान को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इस विरोधाभासी माहौल ने निवेशकों को सतर्क बना दिया।

  1. रुपये की कमजोरी से बिगड़ा माहौल

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 94.15 के स्तर तक पहुंच गया है।
पिछले एक महीने में ही रुपये में करीब 3.5% की गिरावट आई है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।

  1. महंगा कच्चा तेल बना खतरा

ईरान से जुड़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।

ब्रेंट क्रूड करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल महंगा बना रहा, तो कंपनियों की लागत बढ़ेगी, मुनाफा घटेगा और बाजार पर दबाव बना रहेगा।

आगे क्या संकेत?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है और तेल-गैस की सप्लाई प्रभावित रहती है, तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ सकता है। फिलहाल बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल है और सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या किसी बड़े संकट की शुरुआत?

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Shagun Chaurasia

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