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पैसे के बदले शांति! कतर-ईरान समझौते के 3 बड़े असर, सीक्रेट डील से थमा हमला?

Qatar Iran Secret Deal: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच कतर और ईरान के रिश्तों को लेकर एक नई हलचल सामने आई है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच एक “साइलेंट डील” हुई है, जिसके बाद हालात अचानक बदलते नजर आ रहे हैं। खास बात ये है कि 20 मार्च के बाद से ईरान ने कतर पर कोई बड़ा हमला नहीं किया है, जिससे इस समझौते की अटकलें और तेज हो गई हैं।

क्या पैसों के बदले रुका हमला?

इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर ने ईरान को करीब 6 अरब डॉलर देने की पेशकश की है। यह रकम उस फंड से जुड़ी बताई जा रही है, जो 2023 में अमेरिकी कैदियों की रिहाई के बदले ईरान को मिलने वाला था, लेकिन बाद में इसे रोक दिया गया था। अब दावा है कि इसी राशि को लेकर दोनों देशों के बीच नई सहमति बनी है। इस डील के तहत ईरान कतर के तेल और गैस ठिकानों को निशाना नहीं बनाएगा। माना जा रहा है कि यह पैसा ईरान की सैन्य इकाई के जरिए जंग में इस्तेमाल हो सकता है।

डील के बाद तुरंत दिखे 3 बड़े असर

  1. कतर ने बदली अपनी कूटनीतिक भूमिका
    कतर ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह की मध्यस्थता नहीं करेगा। यह बड़ा बदलाव है, क्योंकि कतर को अब तक क्षेत्र का प्रमुख मध्यस्थ माना जाता रहा है।
  2. जंग से खुद को किया अलग
    कतर सरकार ने बयान जारी कर कहा कि यह युद्ध उसका नहीं है। उसने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से दूरी बना ली है और अमेरिका की मदद से भी इनकार कर दिया है।
  3. ईरान के हमलों में अचानक कमी
    20 मार्च के बाद से ईरान की ओर से कतर पर कोई बड़ा हमला नहीं हुआ है। इससे पहले कतर के प्रमुख ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया था, लेकिन अब हालात शांत नजर आ रहे हैं।

पहले हमलों से झटका खा चुका है कतर

ईरान के हमलों से कतर को पहले ही नुकसान उठाना पड़ा है। अब तक 4 लोगों की मौत और 16 लोग घायल हो चुके हैं। सबसे ज्यादा असर एलएनजी प्रोजेक्ट्स पर पड़ा, जिससे उत्पादन में करीब 17% तक गिरावट की आशंका जताई गई है। कतर दुनिया के बड़े गैस सप्लायर्स में शामिल है और भारत, चीन जैसे देशों के साथ-साथ अमेरिका को भी गैस निर्यात करता है। ऐसे में इस तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

क्या सच में हुआ है समझौता?

हालांकि इस कथित डील को लेकर अभी तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन घटनाक्रम जिस तेजी से बदले हैं, उसने इस “साइलेंट डील” को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह शांति बनी रहती है या फिर मिडिल ईस्ट में फिर से हालात बिगड़ते हैं।

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Shagun Chaurasia

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