उत्तर प्रदेश

संभल में रहस्यमयी कुआं फिर खुला… क्या दबा है 1978 की हिंसा का राज़?

Sambhal Story: उत्तर प्रदेश के संभल में एक बार फिर दशकों पुरानी दंगा-कथा ज़िंदा हो उठी है। लगभग 47 साल पहले हुए 1978 के दंगे से जुड़ा एक पुराना कुआं जो वर्षों से बंद और चर्चा से दूर था। अब प्रशासन के निर्देश पर फिर से खोदा जा रहा है। मुस्लिम आबादी वाले मोहल्ले में स्थित यह कुआं उस काले दंगे का हिस्सा माना जाता है, जिसके बारे में दावा है कि एक दुकानदार की हत्या कर उसका शव तराजू से बांधकर इसी कुएं में फेंक दिया गया था।

पुराने दंगे की चर्चाएं फिर तेज़

पिछले कुछ महीनों में पुराने दंगे की चर्चाएं फिर तेज़ हुईं। इसी बीच दंगा पीड़ित परिवार ने प्रशासन को पत्र देकर इस कुएं की खुदाई की मांग की। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के आदेश पर सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार की निगरानी में खुदाई शुरू की गई। नगर पालिका की टीम, पुलिस फोर्स और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर तैनात रहे। कुएं के आसपास बैरिकेडिंग कर क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है।

परिवार ने क्या लगाए आरोप?

पीड़ित परिवार के सदस्य कपिल रस्तोगी ने आरोप लगाया कि 1978 के दंगे की हिंसा में उनके दादा को दुकान पर ही घेरकर बेरहमी से मार डाला गया था। उनका दावा है कि धारदार हथियारों से हत्या कर शव को तराजू से बांधकर कुएं में फेंक दिया गया था। बाद में शव बरामद हुआ, जिसमें कई चाकू के निशान मिले थे। कपिल ने कुछ महीने पहले दिए इंटरव्यू में कहा था कि इतने गंभीर अपराध के बावजूद उस समय कोई FIR तक दर्ज नहीं की गई।

दशकों तक परिवार न्याय का इंतजार करता रहा। हाल ही में विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री द्वारा 1978 के दंगे का उल्लेख किए जाने के बाद इस मामले ने फिर जोर पकड़ा। इसके बाद पीड़ित परिवार ने दो मांगें उठाईं- कुएं की खुदाई कर सच्चाई उजागर की जाए, घटना वाले चौक का नाम उनके दादा के नाम पर रखा जाए। परिवार का कहना है कि इतने वर्षों बाद पहली बार उन्हें उम्मीद की किरण दिखी है।

प्रशासन की कार्रवाई

सिटी मजिस्ट्रेट का कहना है कि यह कदम शिकायत की तथ्यात्मक जांच के लिए उठाया गया है। कुएं के चबूतरे के टूटने के बाद इसकी संरचना स्पष्ट दिखने लगी थी, जिसके बाद तकनीकी टीम ने खुदाई शुरू की। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, काम कई चरणों में होगा- पहले कुएं को पूरी तरह साफ किया जाएगा फिर नीचे मौजूद सामग्री, अवशेष या किसी भी साक्ष्य की वैज्ञानिक जांच की जाएगी। अधिकारी साफ कर चुके हैं कि अभी निष्कर्ष निकलने में समय लगेगा।

क्या 47 साल बाद खुलेंगे दंगे के राज़?

कुएं की खुदाई ने पूरे संभल की हवा में फिर वही पुरानी दहशत, रहस्य और सवाल भर दिए हैं। क्या पुरानी कहानी सच थी? क्या कुएं में अब भी कोई सबूत छिपा है? या यह केवल एक दंतकथा थी, जिसे समय ने मिथक बना दिया? सच क्या है, यह आने वाले दिनों में खुदाई की परतों के साथ सामने आएगा।

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Shagun Chaurasia

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