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NEET Re-Exam से पहले तमिलनाडु में तीन छात्रों की मौत, परीक्षा के दबाव पर फिर उठे सवाल

Tamil Nadu: तमिलनाडु में 21 जून को आयोजित NEET पुनर्परीक्षा से पहले चार दिनों के भीतर तीन अभ्यर्थियों की मौत ने राज्य में राष्ट्रीय चिकित्सा प्रवेश परीक्षा को लेकर विवाद और राजनीतिक आक्रोश को और बढ़ा दिया है। ये घटनाएं सेलम, धर्मपुरी और कृष्णागिरि जिलों में सामने आईं। मृतकों की पहचान सेलम की 19 वर्षीय एस. गोपिका, धर्मपुरी की 19 वर्षीय आर. रोशिनी और कृष्णागिरि के 20 वर्षीय सी. वेत्री आनंदन के रूप में हुई है।

इससे पहले 3 मई के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में कम से कम 12 NEET अभ्यर्थियों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। 3 मई को हुई परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई।

परीक्षा का दबाव बना कारण

गोपीका पिछले दो वर्षों से बिना कोचिंग के तैयारी कर रही थीं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली गोपीका ने तीन बार NEET दिया था। पुलिस के अनुसार, उन्होंने अपने पिता से बढ़ते दबाव और पुनर्परीक्षा की घोषणा के बाद बढ़ी चिंता की बात कही थी। शुक्रवार को कथित आत्महत्या के प्रयास के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

रोशिनी ने 2025 में 12वीं पास की थी और नमक्कल के कोचिंग सेंटर से पढ़ाई करने के बाद घर लौटकर तैयारी कर रही थीं। शनिवार शाम उनके पिता ने उन्हें मृत पाया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और अभी परीक्षा के दबाव को कारण मानने की पुष्टि नहीं की गई है।

वेत्री आनंदन 2023 में 12वीं पास करने के बाद दो साल तक कोचिंग लेते रहे थे। मई की परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें दोबारा तैयारी करनी पड़ी, जिससे वे परेशान थे। पुलिस को मिले नोट में उन्होंने लिखा कि पिछले एक महीने से डर और अनिद्रा के कारण वह परेशान थे और दोबारा असफल होने की आशंका से जूझ रहे थे। उन्होंने अपने फैसले के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया और माता-पिता व भाई से माफी मांगी।

उधर, नीलगिरि जिले के कुन्नूर में 18 वर्षीय एक छात्रा ने रविवार सुबह परीक्षा केंद्र जाने से पहले आत्महत्या का प्रयास किया। उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका गहन उपचार जारी है।

सियासी विवाद तेज

इन घटनाओं के बाद डीएमके छात्र इकाई ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया और केंद्र की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया। पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने कहा कि NEET को या तो पूरे देश में समाप्त किया जाना चाहिए या फिर तमिलनाडु को इससे छूट मिलनी चाहिए। वहीं, वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने राज्य सरकार से कानूनी कदम उठाकर तमिलनाडु के लिए छूट सुनिश्चित करने की मांग की।

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Tanisha Verma

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