Wildlife Smuggling Network India: ओडिशा की एक प्लांटेशन से पांच युवा ओरंगुटान बरामद होने के बाद भारत में विदेशी वन्यजीवों की तस्करी को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। ओरंगुटान भारत में प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते। इनका मूल आवास मुख्य रूप से इंडोनेशिया के बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों के जंगल हैं। ऐसे में इनका भारत पहुंचना किसी संगठित और कई देशों से गुजरने वाले तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
DTE की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व एशिया से भारत तक वन्यजीवों को पहुंचाने के लिए जमीन, समुद्र और हवाई मार्गों का इस्तेमाल किया जाता है। उसके रूट मैप में बोर्नियो और सुमात्रा से मलेशिया, थाईलैंड, म्यांमार और बांग्लादेश होते हुए भारत तक पहुंचने वाले कई रास्ते दिखाए गए हैं।
बोर्नियो-सुमात्रा से शुरू होता नेटवर्क
तस्करी के संभावित रास्ते उन इलाकों से शुरू होते हैं जहां दुर्लभ और विदेशी प्रजातियां पाई जाती हैं। बोर्नियो और सुमात्रा से जानवरों को पहले मलेशिया या थाईलैंड ले जाया जा सकता है। इसके बाद म्यांमार या समुद्री और हवाई मार्गों से भारत पहुंचाने की कोशिश हो सकती है।
म्यांमार और मोरेह अहम कड़ी
जमीन के रास्ते आने वाले नेटवर्क में म्यांमार महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता है। वहां से जानवरों को पूर्वोत्तर भारत की सीमा तक लाकर आगे सड़क मार्ग से दूसरे राज्यों में भेजा जा सकता है। भारत-म्यांमार सीमा पर मोरेह एक प्रमुख प्रवेश बिंदु है।
बांग्लादेश से भी भारत में प्रवेश
रूट मैप में बांग्लादेश वाला रास्ता भी शामिल है। जानवरों को म्यांमार से बांग्लादेश ले जाकर वहां से भारत में दाखिल कराने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, ओडिशा में मिले पांच ओरंगुटान किस रास्ते से भारत पहुंचे, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
एयरपोर्ट और समुद्री रास्तों का इस्तेमाल
तस्करी में हवाई और समुद्री मार्ग भी अहम हैं। बोर्नियो-सुमात्रा से थाईलैंड और फिर भारत तक ऐसे रूट मौजूद हैं। मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन वाले शहरों के जरिए विदेश से आए जानवरों को देश के दूसरे हिस्सों में भेजने की कोशिश की जा सकती है।
ओरंगुटान के अलावा भी कई प्रजातियां निशाने पर
इस अवैध कारोबार में विदेशी कछुए, सांप, छिपकलियां, बंदर और अन्य दुर्लभ जीव भी शामिल हैं। कई जानवरों को विदेशी पालतू जानवरों के रूप में बेचने के लिए लाया जाता है। तस्कर रास्ते और देश बदलते रहते हैं, जिससे नेटवर्क पर कार्रवाई चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ओडिशा में मिले पांच ओरंगुटान ने अब इस बड़े सवाल को सामने ला दिया है कि विदेशी वन्यजीव भारत किन रास्तों से पहुंच रहे हैं और इनके पीछे कौन लोग हैं। इसलिए यह बरामदगी अब सिर्फ स्थानीय मामला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी की जांच का विषय बन गई है।
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